
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार।(फोटो- ANI)
कर्नाटक में बिडादी टाउनशिप प्रोजेक्ट को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। राज्य में विपक्षी भाजपा ने कांग्रेस सरकार और नए मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
भाजपा का आरोप है कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने सत्ता संभालते ही रियल एस्टेट का कारोबार शुरू कर दिए। साथ ही यह प्रोजेक्ट तीन राज्यों के चुनावों के लिए पैसा जुटाने का जरिया बन गया है।
फ्रीडम पार्क में शुक्रवार को पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के नेतृत्व में हुई बड़ी रैली के बाद भाजपा के नेता आर अशोक ने यह गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि किसानों की उपजाऊ जमीन छीनकर कांग्रेस आला कमान चुनावी खजाना भरने में लगा है।
अशोक ने कहा कि शिवकुमार मुख्यमंत्री बनने के बाद पिछले 30 दिनों में किसानों के लिए एक भी नया सिंचाई प्रोजेक्ट शुरू नहीं किया है। सड़कों पर गड्ढे भरे पड़े हैं और सूखा प्रभावित किसानों को मुआवजा तक नहीं मिला।
राज्य के राजस्व मंत्री ने भले ही केंद्र से राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग की है, लेकिन अशोक ने कहा कि इस सरकार के आने से ही किसानों पर आफत आई है।
अशोक ने बिडादी के किसानों से मुलाकात का जिक्र करते हुए बताया कि किसानों पर मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं, धमकियां दी जा रही हैं। इस पर भाजपा नेता ने कांग्रेस को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर किसान गिरफ्तार हुए तो एसपी दफ्तर घेर लेंगे।
आर अशोक ने साफ किया कि भाजपा या जेडीएस का इस प्रोजेक्ट में कोई रोल नहीं रहा। उन्होंने बताया कि जब डीवी सदानंद गौड़ा, जगदीश शेट्टार या येदियुरप्पा मुख्यमंत्री थे, तब भी इस प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहण नहीं हुआ। खुद अशोक ने राजस्व मंत्री रहते कोई फाइल साइन नहीं की।
उन्होंने सवाल उठाया कि एचडी कुमारस्वामी के समय सिर्फ प्रारंभिक बैठक हुई थी और उन्होंने विधानसभा में घोषणा की थी कि प्रोजेक्ट नहीं चलेगा। फिर कांग्रेस अब इस प्रोजेक्ट को क्यों अपना रही है?
अशोक ने कहा कि सिद्धारमैया विपक्ष में रहते इस प्रोजेक्ट के खिलाफ बोलते थे, कहते थे कि छोटे किसान सब्जी उगाते हैं, उनकी जमीन न छीनी जाए। वह अब चुप्पी क्यों हैं? भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि प्रति एकड़ 4-5 करोड़ का कमीशन तय है। जो तीन राज्यों के चुनाव में इस्तेमाल होगा।
अशोक का सबसे तीखा आरोप यह था कि बिडादी और बैरमंगला में किसानों की जमीन अधिग्रहण कर पैसा जुटाया जा रहा है। पहले 2750 एकड़ सरकारी जमीन थी, अब सिर्फ 700 एकड़ बची है। बाकी 2000 एकड़ किसी और ने हड़प ली।
उन्होंने कहा कि यह सिर्फ बिडादी किसानों की लड़ाई नहीं, पूरे कर्नाटक के किसानों की लड़ाई है। अनेकल में भी इसी तरह का संघर्ष चल रहा है। सभी किसान संगठनों से समर्थन मांगा गया है।
Updated on:
17 Jul 2026 09:59 pm
Published on:
17 Jul 2026 09:59 pm
