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रूस-यूक्रेन युद्ध से गहराया गेहूं का संकट, ब्लैक सी बंद हुई तो अफ्रीका-मिडिल ईस्ट में बढ़ेगा भुखमरी का खतरा

Russia-Ukraine War: रूस-यूक्रेन युद्ध से गेहूं का संकट गहरा गया है। ब्लैक सी निर्यात मार्ग बंद होने पर रूसी गेहूं की 3-3.5 करोड़ टन कमी आ सकती है, जिससे अफ्रीका और मध्य पूर्व में भुखमरी का खतरा बढ़ जाएगा।
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Jul 31, 2026
Russia Ukraine War
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडीमिर जेलेंस्की और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन। (फोटो- ANI)

रूस-यूक्रेन युद्ध से कुछ देशों में गेहूं का संकट बढ़ने वाला है। रूस के अनाज निर्यातकों ने चेतावनी दी है कि यूक्रेन के ड्रोन हमलों से ब्लैक सी का रास्ता बंद हो सकता है। इससे दुनिया भर में गेहूं की कीमतें आसमान छू सकती हैं और गरीब देशों में भुखमरी बढ़ सकती है।

बता दें कि रूस दुनिया का सबसे बड़ा गेहूं निर्यातक देश है। लेकिन पिछले कुछ हफ्तों में दोनों देश एक-दूसरे के बंदरगाहों और जहाजों पर हमले कर रहे हैं। अब रूसी अनाज लॉबी ने कहा है कि जुलाई से शुरू हुए ये हमले जल्द ही ब्लैक सी के निर्यात गलियारे को पूरी तरह बंद कर सकते हैं।

रूसी लॉबी की चेतावनी

रॉयटर्स ने रूस के यूनियन ऑफ ग्रेन एक्सपोर्टर्स एंड प्रोड्यूसर्स के हवाले से बताया कि अगर रूस-यूक्रेन के बीच हमले ऐसे ही जारी रहे तो रूसी गेहूं की सप्लाई में 3 से 3।5 करोड़ टन की कमी आ सकती है।

उन्होंने आगे कहा- यह वैश्विक गेहूं व्यापार का करीब 15 प्रतिशत हिस्सा है। दूसरे देशों से बढ़ाकर इस कमी को पूरा करना नामुमकिन होगा। लॉबी ने साफ कहा- ब्लैक सी में जहाजों और बंदरगाहों पर यूक्रेन के हमले वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए सीधा खतरा हैं।

हमलों का असर आम लोगों पर

ये हमले सिर्फ रूस-यूक्रेन की लड़ाई तक सीमित नहीं हैं। इससे अफ्रीका और मध्य पूर्व के करोड़ों गरीब लोग प्रभावित होंगे। कई देश रूस से सस्ते गेहूं खरीदते हैं। अगर निर्यात रुक गया तो ब्रेड, आटा और दालों जैसी जरूरी चीजों की कीमतें बढ़ जाएंगी।

पिछले साल भी जब ब्लैक सी ग्रेन डील टूटी थी तब कीमतें बढ़ी थीं। अब फिर वही हालात बन रहे हैं। रूसी लॉबी का कहना है कि सितंबर तक स्थिति और बिगड़ सकती है।

दोनों देशों के बीच बढ़ती टकरार

रूस और यूक्रेन दोनों ही बड़े अनाज निर्यातक हैं। जंग शुरू होने के बाद से ही उनके बंदरगाह और जहाज निशाने पर हैं। हाल के हफ्तों में यूक्रेन ने रूसी जहाजों और पोर्ट पर ड्रोन हमले बढ़ा दिए हैं। रूस भी जवाबी कार्रवाई कर रहा है।

इससे व्यापारी जहाजों को ब्लैक सी से गुजरने में डर लगने लगा है। बीमा कंपनियां भी महंगे रेट ले रही हैं। कई कंपनियां अब दूसरे रास्ते तलाश रही हैं, लेकिन ब्लैक सी सबसे सस्ता और आसान रास्ता है।

वैश्विक खाद्य संकट का डर

विश्व बैंक और संयुक्त राष्ट्र पहले ही चेतावना दे चुके हैं कि अनाज की कमी से गरीब देशों में अस्थिरता बढ़ सकती है। मिस्र, इंडोनेशिया और नाइजीरिया जैसे देश भारी मात्रा में रूसी गेहूं खरीदते हैं।

रूसी लॉबी ने अपील की है कि दोनों पक्ष कृषि निर्यात सुविधाओं को निशाना बनाना बंद करें। लेकिन जंग के बीच यह अपील कितनी असरदार होगी, यह देखने वाली बात होगी।

Updated on:
31 Jul 2026 08:18 pm
Published on:
31 Jul 2026 08:17 pm