Brain Intelligence Research: उम्र बढ़ने के साथ मस्तिष्क का नेटवर्क बड़ा या घना नहीं होता, बल्कि अधिक व्यवस्थित और कुशल हो जाता है। बचपन का उलझा हुआ जाल वयस्क होने तक एक सुव्यवस्थित तंत्र में बदल जाता है।
Newborn Brain Study: इंसानी दिमाग को लेकर लंबे समय से एक आम धारणा रही है कि यह शुरुआत में खाली स्लेट जैसा होता है और बाद में भरता चला जाता है। ऑस्ट्रिया के न्यूरो साइंटिस्ट पीटर जोंस की नई रिसर्च इस धारणा को चुनौती देते हुए बताती है कि इंसानी दिमाग जन्म के समय 'भरा' होता है। चूहो पर किए गए प्रयोग में शोधकर्ताओं ने याददाश्त के सबसे जिम्मेदार हिस्से हिप्पोकैम्पस का अध्ययन किया और पाया कि नवजात में में न्यूरॉन्स के बीच कनेक्शन बेहद घने और लगभग बेतरतीब होते हैं। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, यह जाल पतला, व्यवस्थित और ज्यादा कुशल बनता जाता है। वैज्ञानिकों ने इसे 'टैबुला रासा' यानी खाली स्लेट नहीं, बल्कि 'टैबुला प्लेना' यानी पहले से भरी स्लेट का मॉडल बताया है। नई रिसर्च संकेत देती है कि इंसानी बुद्धिमत्ता का रहस्य 'जोड़ने' से ज्यादा 'हटाने' की कला में छिपा है।
वैज्ञानिक भाषा में इस प्रक्रिया को 'सिनैप्टिक प्रूनिंग' कहा जाता है। मस्तिष्क में यह प्रक्रिया बचपन से लेकर लगभग 20-25 साल की उम्र तक चलती है। शोध बताते हैं कि जन्म के समय एक बच्चे के दिमाग में वयस्क की तुलना में लगभग दोगुने 'सिनैप्स' (कनेक्शन) होते हैं। यदि यह छंटनी सही ढंग से न हो, तो मस्तिष्क सूचनाओं के बोझ से दब सकता है, जो ऑटिज्म या सिजोफ्रेनिया जैसी स्थितियां ला सकता है।
उम्र बढ़ने के साथ मस्तिष्क का नेटवर्क बड़ा या घना नहीं होता, बल्कि अधिक व्यवस्थित और कुशल हो जाता है। बचपन का उलझा हुआ जाल वयस्क होने तक एक सुव्यवस्थित तंत्र में बदल जाता है। जैसे कोई मूर्तिकार बेकार हिस्से निकालकर एक सुंदर आकृति निकालता है, वैसे ही हमारा मस्तिष्क समय के साथ फालतू कनेक्शनों को हटाता जाता है।
वैज्ञानिकों के अनुसार यह तरीका सीखने की गति को भी बढ़ाता है। दिमाग को हर नई जानकारी के लिए नया रास्ता बनाने की जरूरत नहीं पड़ती। वह पहले से मौजूद हजारों रास्तों में से सबसे प्रभावी रास्ते चुन लेता है। इसे ऐसे समझा जा सकता है जैसे किसी शहर में हर दिन नई सड़कें बनाने के बजाय, ट्रैफिक सिस्टम पहले से मौजूद सड़कों में सबसे छोटा और तेज रास्ता खोज ले। यही वजह है कि बड़ा होते-होते इंसान की सोच अधिक स्पष्ट और निर्णय अधिक सटीक होते जाते हैं।