
India Pakistan Kashmir Dispute: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शुक्रवार (स्थानीय समय) संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र को संबोधित करते हुए एक बार फिर कश्मीर का मुद्दा उठाया। उन्होंने इस विवाद के न्यायपूर्ण और निष्पक्ष समाधान की मांग करते हुए कहा कि कश्मीरी लोग संयुक्त राष्ट्र द्वारा अपनी देखरेख में स्वतंत्र और निष्पक्ष जनमत संग्रह कराए जाने के वादे को पूरा होते देखने का इंतजार कर रहे हैं।
शरीफ ने कहा कि, कश्मीर विवाद का न्यायपूर्ण और निष्पक्ष समाधान ज़रूरी है। आठ दशकों से, कश्मीरी लोग संयुक्त राष्ट्र द्वारा अपनी देखरेख में स्वतंत्र और निष्पक्ष जनमत संग्रह के अपने गंभीर वादे को पूरा करने का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कश्मीरियों की कई पीढ़ियों ने अवैध कब्जे, मनमाने ढंग से हिरासत में लिए जाने, बिना कानूनी प्रक्रिया के हत्याओं, जबरदस्ती गायब किए जाने, यौन हिंसा और सामूहिक सजा का सामना किया है।
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने आगे दावा किया कि जनसांख्यिकीय बदलावों और अन्य उपायों के जरिए जम्मू-कश्मीर की कानूनी स्थिति को बदलने की कोशिशें की गई हैं। उन्होंने कहा, हाल ही में, जनसांख्यिकीय बदलाव और अन्य अवैध उपायों के जरिए जम्मू-कश्मीर की कानूनी स्थिति को बदलने की कोशिशें की गई हैं। बेबस कश्मीरी माता-पिता अपने उन बेटों और बेटियों के लिए तरसते हैं जो कभी वापस नहीं लौटते। उनके घर कर्फ्यू और गहरे दुख के साये में खामोश पड़े हैं।
कश्मीरी लोगों को संबोधित करते हुए शरीफ ने भरोसा दिलाया कि पाकिस्तान तब तक अपना राजनयिक, राजनीतिक और नैतिक समर्थन देता रहेगा जब तक उन्हें आत्मनिर्णय का अटूट अधिकार नहीं मिल जाता। उन्होंने कहा कि, बहुत से लोगों के लिए कोई समाधान नहीं है, बस पूरी जिंदगी उन कब्रों को खोजने में बीत जाती है जिन पर कोई नाम नहीं होता।
इस मंच से, मैं अपने कश्मीरी भाइयों और बहनों को पूरे अधिकार के साथ भरोसा दिलाता हूं कि हम उन्हें तब तक अपना पूरा राजनयिक, राजनीतिक और नैतिक समर्थन देते रहेंगे जब तक उन्हें आत्मनिर्णय का उनका अटूट अधिकार नहीं मिल जाता। उन्होंने कहा कि, कश्मीर हमेशा से पाकिस्तान की जीवन-रेखा (जुगुलर वेन) रहा है और हमेशा रहेगा।