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श्रीलंका सरकार का बड़ा फ़ैसला, ईरान के नाविकों को एक महीने का फ़्री वीज़ा

Iranian Sailors: हिंद महासागर में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच श्रीलंका ने बड़ा मानवीय कदम उठाया है। अमेरिकी पनडुब्बी हमले का शिकार हुए ईरानी नाविकों को श्रीलंका ने एक महीने का फ्री वीज़ा (Gratis Visa) देकर शरण दी है।

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Mar 09, 2026
श्रीलंका ईरानियों को फ्री वीज़ा देगा। (फोटो: AI)

Indian Ocean Tension : हिंद महासागर में अमेरिका और ईरान के बीच गहराते सैन्य तनाव (Indian Ocean Tension) के बीच श्रीलंका सरकार ने एक अहम और बड़ा मानवीय कदम उठाया है। श्रीलंका ने संकट में फंसे ईरानी नौसैनिकों को एक महीने का मुफ्त (ग्रांटिस) वीज़ा( Sri Lanka Visa for Iranians) देने का ऐलान किया है। यह फैसला उन ईरानी नाविकों को राहत देने के लिए लिया गया है, जो हाल ही में एक अमेरिकी पनडुब्बी के घातक हमले का शिकार (IRIS Dena sinking) हुए थे। श्रीलंका के जन सुरक्षा मंत्री आनंदा विजेपाला ने स्पष्ट किया है कि यह कदम किसी भी देश का पक्ष लेने के लिए नहीं है, बल्कि विशुद्ध रूप से अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों और मानवीय आधार पर उठाया गया है।

हमले का शिकार हुआ था ईरानी युद्धपोत (US Submarine Attack)

हाल ही में भारत के सैन्य अभ्यास से लौट रहे ईरानी युद्धपोत 'आईआरआईएस डेना' (IRIS Dena) को एक अमेरिकी पनडुब्बी ने टॉरपीडो से निशाना बनाया था। इस भीषण हमले में जहाज डूब गया और कई ईरानी नौसैनिकों की जान चली गई। घटना के तुरंत बाद श्रीलंका की नौसेना ने तत्परता दिखाते हुए समुद्र में डूब रहे 32 ईरानी नाविकों की जान बचाई। इसके अलावा, युद्ध के खतरे को देखते हुए ईरान के एक अन्य जहाज 'आईआरआईएस बुशहर' (IRIS Bushehr) से भी लगभग 200 से अधिक नाविकों को सुरक्षित निकाला गया और उन्हें श्रीलंका के नेवल बेस में शरण दी गई।

श्रीलंका की तटस्थ और मानवीय नीति (Repatriation)

मंत्री विजेपाला ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि इन सभी नाविकों को फिलहाल मानवीय सुरक्षा के तहत श्रीलंका में रखा जाएगा। जब तक उनकी सुरक्षित वतन वापसी (Repatriation) की व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक उन्हें रहने की जगह, सुरक्षा और जरूरी चिकित्सा सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। गॉल के करापिटिया अस्पताल में घायल नाविकों का इलाज जारी है।

संकट में फंसे लोगों की जान बचाना उनकी पहली प्राथमिकता

श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने भी इस बात पर जोर दिया है कि उनका देश अपनी पुरानी 'गुटनिरपेक्ष नीति' का पालन कर रहा है और संकट में फंसे लोगों की जान बचाना उनकी पहली प्राथमिकता है। श्रीलंका सरकार के जन सुरक्षा मंत्री और राष्ट्रपति ने इस कदम को पूरी तरह से 'मानवीय कर्तव्य' बताया है। उनका साफ कहना है कि श्रीलंका किसी भी युद्ध या गुट का हिस्सा नहीं है, लेकिन मुसीबत में फंसे इंसानों की मदद करने से कभी पीछे नहीं हटेगा।

अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक समुदाय की राय

रक्षा और कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि श्रीलंका का यह कदम बेहद साहसिक है। अमेरिका जैसे शक्तिशाली देश के कूटनीतिक दबाव की संभावनाओं के बावजूद, श्रीलंका ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर तटस्थता का एक बेहतरीन उदाहरण पेश किया है। इस फैसले से ईरानी दूतावास को बड़ी राहत मिली है। दूतावास अपने नागरिकों के बेहतर इलाज और उनकी जल्द सुरक्षित स्वदेश वापसी के लिए श्रीलंकाई प्रशासन के साथ लगातार संपर्क में बना हुआ है।

वतन वापसी की रूपरेखा

एक महीने की वीजा अवधि समाप्त होने के बाद इन नाविकों को ईरान कैसे सुरक्षित वापस भेजा जाएगा, इस पर श्रीलंका और ईरानी दूतावास मिलकर एक 'एग्जिट प्लान' तैयार कर रहे हैं। इस मानवीय फैसले पर श्रीलंकाई कैबिनेट द्वारा जल्द ही औपचारिक मुहर लगाई जाएगी ताकि सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की जा सकें। अस्पताल में भर्ती नाविकों के स्वास्थ्य पर 24 घंटे नजर रखी जा रही है। जो नाविक पूरी तरह से स्वस्थ हो चुके हैं, उन्हें जल्द ही अस्पताल से छुट्टी देकर सुरक्षित कैंपों में शिफ्ट किया जा रहा है।

हिंद महासागर में भू-राजनीतिक भूचाल

खुले समुद्र में अमेरिका द्वारा ईरानी युद्धपोत को डुबोए जाने से इस पूरे क्षेत्र में युद्ध का खतरा मंडराने लगा है। यह घटना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि मध्य पूर्व का संघर्ष अब एशियाई समुद्री सीमाओं और व्यापारिक मार्गों तक पहुंच गया है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी एक बड़ी चिंता का विषय है।

इस मामले का भारत से कनेक्शन

एक दुखद पहलू है कि जिस ईरानी जहाज 'आईआरआईएस डेना' पर हमला हुआ, वह भारत के विशाखापत्तनम में आयोजित बहुराष्ट्रीय नौसैन्य अभ्यास में हिस्सा लेकर लौट रहा था। इस दौरे पर इन ईरानी नाविकों ने आगरा का ताजमहल भी देखा था और स्थानीय लोगों के साथ तस्वीरें खिंचवाई थीं।

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