
ईरान (Iran) और अमेरिका (United States of America) के बीच शांति समझौता (Iran-US Peace Deal) हो गया है। शुक्रवार को दोनों पक्षों के बीच स्विट्ज़रलैंड (Switzerland) के बर्गनस्टॉक (Bürgenstock) में बातचीत होनी थी, लेकिन अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) ने अपना दौरा टाल दिया, जिसके बाद सवाल उठे शुरू हो गए कि आखिर यह मीटिंग क्यों नहीं हुई? लेकिन अब ट्रंप के करीबी राजदूत स्टीव विटकॉफ (Steve Witkoff) स्विट्ज़रलैंड के लिए रवाना हो गए हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के दामाद और राजदूत जेरेड कुशनर पहले से ही स्विट्ज़रलैंड में मौजूद हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि विटकॉफ और कुशनर दोनों ही अमेरिकी शांति टीम के अहम राजदूत हैं और ईरान से बातचीत को आगे बढ़ाने में दोनों की अहम भूमिका रही।
विटकॉफ और कुशनर के साथ ही ईरान की तरफ से भी प्रतिनिधिमंडल जल्द ही स्विट्ज़रलैंड पहुंच सकता है। इनमें ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) शामिल होंगे जिन्होंने ईरान की तरफ से शांति समझौते के लिए बातचीत को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। दोनों देशों के बीच शांति समझौते के बाद अमेरिका और ईरान के बीच अब पहली बार बातचीत होगी, जिसमें परमाणु मुद्दे समेत 14-सूत्रीय शांति समझौते की अन्य शर्तों पर विस्तार से बातचीत संभव है।
स्विट्ज़रलैंड में अमेरिकी और ईरान प्रतिनिधिमंडल के बीच लेबनान (Lebanon) मुद्दे पर चर्चा होना तय है। लेबनान पर इज़रायली हमले जारी हैं, जिन्हें ईरान ने शांति समझौते का उल्लंघन बताया है। डोनाल्ड ट्रंप ने भी कई बार इज़रायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) को लेबनान पर हमले रोकने के लिए कहा है। उनकी मध्यस्थता में दोनों देशों के बीच कई बार सीज़फायर हुआ, लेकिन इसका भी कोई फायदा नहीं हुआ। लेबनान पर लगातार इज़रायली हमलों की वजह से ट्रंप ने दो बार फोन पर नेतन्याहू को फटकार भी लगाई है। ईरान के लिए लेबनान मुद्दा बेहद ही अहम है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी कह चुके हैं कि लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध खत्म करने की ज़िम्मेदारी ट्रंप प्रशासन ने ली है।