Strait of Hormuz में बढ़ते तनाव के बीच भारतीय तेल टैंकर 'देश गरिमा' का सुरक्षित पार होना अहम संकेत है। ईरान-अमेरिका विवाद के चलते शिपिंग जोखिम, देरी और बीमा लागत बढ़ी। भारत ने 12,980 करोड़ रुपये का मैरीटाइम इंश्योरेंस पूल बनाकर जहाजों को राहत देने की तैयारी की है।
Strait of Hormuz: खाड़ी क्षेत्र में तनाव के बीच समुद्री रास्तों पर हलचल लगातार बनी हुई है। शनिवार को एक और भारतीय कच्चे तेल का टैंकर Strait of Hormuz पार कर गया। 'देश गरिमा' नाम का यह जहाज इस संकट के दौरान इस रास्ते से गुजरने वाला दसवां भारतीय पोत बन गया है। खास बात यह है कि युद्धविराम के बाद यह दूसरा भारतीय टैंकर है जिसने यह सफर तय किया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह टैंकर कतर के रास लाफान पोर्ट से निकला था और अब Gulf of Oman में पहुंच चुका है। शनिवार को कम से कम आठ तेल और गैस के जहाज इस जलमार्ग से गुजरे।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे ज्यादा उलझन इस बात को लेकर है कि आखिर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुला है या नहीं। ईरान की तरफ से एक तरफ यह कहा गया कि इस रास्ते को बंद कर दिया गया है, वहीं कुछ घंटों पहले ही उनके विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा था कि रास्ता चालू है। बाद में ईरान के सैन्य मुख्यालय के प्रवक्ता ने बयान दिया कि अब इस रास्ते को सख्त सैन्य निगरानी में रखा गया है। उन्होंने अमेरिका पर आरोप लगाते हुए कहा कि बार-बार नियम तोड़े जा रहे हैं और नाकाबंदी के नाम पर 'समुद्री डकैती' जैसी हरकतें हो रही हैं।
इस तनाव का असर साफ तौर पर शिपिंग सेक्टर पर दिख रहा है। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी रास्ते से गुजरता है, इसलिए किसी भी तरह की रुकावट से पूरी सप्लाई चेन प्रभावित होती है। जहाज कंपनियों के लिए खतरा बढ़ गया है। खर्च ज्यादा हो रहा है, देरी हो रही है और जहाजों की सुरक्षा भी चिंता का विषय बन गई है। इन हालात को देखते हुए भारत सरकार ने भी एक अहम कदम उठाया है। सरकार ने 'भारत मैरीटाइम इंश्योरेंस पूल' बनाने को मंजूरी दी है, जिसके लिए लगभग 12,980 करोड़ रुपये का गारंटी फंड रखा गया है। इसका मकसद यही है कि बढ़ते बीमा प्रीमियम और सख्त नियमों के बीच भारतीय जहाजों को राहत मिल सके। अभी हालात ऐसे हैं कि बीमा कंपनियां हर केस को अलग-अलग देखकर ही कवर दे रही हैं।