Talha Saeed anti-India speech 2025:हाफिज सईद के बेटे तल्हा सईद ने लाहौर में एक रैली में भारत के खिलाफ हिंसा भड़काने वाला भाषण दिया, जिसमें पाकिस्तानी नेता भी मौजूद थे।
Talha Saeed anti-India speech 2025: संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंधित आतंकी हाफिज सईद ( Hafiz Saeed) के बेटे तल्हा सईद (Talha Saeed speech 2025) की पाकिस्तान के लाहौर में आयोजित एक भारत विराधी सार्वजनिक रैली (Anti-India rally Pakistan) में मंच पर मौजूदगी और भारत-विरोधी भाषण ने नई हलचल मचा दी है। रैली के दौरान तल्हा ने न सिर्फ भारत को धमकी दी, बल्कि अपने पिता हाफिज सईद की ओर से “सलाम” भेजते हुए खुलेआम जिहाद (Jihad) करने की पैरवी की। इस मंच पर पाकिस्तानी पंजाब विधानसभा के स्पीकर मलिक अहमद खान और अन्य राजनेताओं की मौजूदगी ने खुफिया एजेंसियों को चौकन्ना कर दिया है।
पाकिस्तान के लाहौर में बुधवार को आयोजित एक कथित धार्मिक रैली, जो वास्तविकता में भारत-विरोधी प्रचार मंच बन गई। रैली में एक और चिंताजनक बात यह रही कि वहां हाफिज सईद और पाक सेना प्रमुख असीम मुनीर के संयुक्त पोस्टर प्रदर्शित किए गए, जो आतंक और सत्ता के बीच खतरनाक गठजोड़ का संकेत हैं। तल्हा सईद ने अपने भाषण में भारत को सिंधु जल समझौता रोकने की धमकी दी, और कहा कि "अल्लाह उन लोगों से प्यार करता है जो जिहाद करते हैं।"
सीएनएन को शीर्ष खुफिया सूत्रों ने बताया कि यह पूरा घटनाक्रम दर्शाता है कि पाकिस्तान में आतंकवाद को अब संस्थागत संरक्षण मिल रहा है। "ऑपरेशन बनयान अल-मर्सस" और "सिंदूर ऑपरेशन" के संदर्भ में तल्हा सईद ने भारत को पानी के मुद्दे पर 'गला घोंटने' की धमकी दी, जो न सिर्फ उकसावे का मामला है, बल्कि इसे आतंक का सीधा समर्थन माना जा रहा है।
भारतीय खुफिया एजेंसियों ने तल्हा के बयान को गंभीर सुरक्षा चुनौती करार दिया है। पूर्व राजनयिकों और रक्षा विशेषज्ञों ने इसे पाकिस्तान की दोहरी नीति का सुबूत बताया है। भारत में विपक्ष ने केंद्र सरकार से इस पर सख्त कूटनीतिक प्रतिक्रिया की मांग की है।
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खुफिया सूत्रों के अनुसार, तल्हा सईद की यह रैली पाकिस्तानी सेना और चरमपंथी संगठनों के बीच तालमेल का 'पायलट प्रोजेक्ट' मानी जा रही है। सूत्रों ने दावा किया कि यह कार्यक्रम "ऑपरेशन बनयान अल-मर्सस" की सालगिरह के बहाने आयोजित किया गया था, लेकिन असली मकसद भारत विरोधी एजेंडा को स्थानीय राजनीति में घुसाना था। इसमें पाकिस्तानी सेना की "डिफेंस कम्युनिकेशन विंग" ने पर्दे के पीछे तकनीकी और प्रचार सहयोग दिया। रैली के बाद, लाहौर के गुप्त स्थानों पर कुछ चरमपंथी नेताओं के साथ बंद कमरे की बैठक भी हुई जिसमें POK में सक्रिय गुटों को "जल्द सक्रिय करने" की रणनीति पर चर्चा की गई।