
Trump Washington Arch: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वॉशिंगटन का स्वरूप बदलने की योजना के तहत अब राजधानी में 250 फीट ऊंचा विजय द्वार बनाया जाएगा। इस विशाल आर्च को नेशनल कैपिटल प्लानिंग कमीशन से अहम मंजूरी मिल गई है। इसका डिजाइन पेरिस के मशहूर आर्क डी ट्रायम्फ जैसा होगा, लेकिन यह उससे 80 फीट से भी ज्यादा ऊंचा होगा। हालांकि, कानूनी चुनौतियों के चलते एक जज अब भी इसके निर्माण पर रोक लगा सकते हैं।
आर्च करीब 250 फीट (76 मीटर) ऊंचा होगा। इसे पेरिस के मशहूर 'आर्क डी ट्रायम्फ' (Arc de Triomphe) की तर्ज पर डिजाइन किया गया है। यह आर्च पोटोमैक नदी के पार लिंकन मेमोरियल के सामने और अर्लिंग्टन नेशनल सेमेट्री के प्रवेश द्वार के पास एक हाईवे के गोल चक्कर पर बनाया जाएगा। इसकी ऊंचाई अमेरिकी कैपिटल बिल्डिंग (लगभग 288 फीट) के लगभग बराबर होगी। इसके डिजाइन के अनुसार, आर्च के ऊपर 60 फीट ऊंची सुनहरे पंखों वाली एक महिला की आकृति होगी, जिसके हाथों में मशाल होगी। इसके दोनों तरफ सोने के रंग के उड़ते हुए बाज बनाए जाएंगे। इसमें एक अखंड ज्योति और तेज रोशनी वाली लाइटें भी लगाई जाएंगी, ताकि यह रात में विमानों के पायलटों को भी साफ दिखाई दे सके।
राष्ट्रपति ट्रंप का दावा है कि यह आर्च केवल खूबसूरती के लिए नहीं है, बल्कि यह एक सैन्य संपत्ति के रूप में भी काम करेगा। इसमें ड्रोन और स्नाइपर्स (शार्पशूटर्स) को तैनात करने की विशेष व्यवस्था होगी। ट्रंप का कहना है कि यह रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण जगह पर स्थित है और यह दुनिया का सबसे खूबसूरत आर्च बनेगा।
सरकार के अनुसार, खुदाई और नींव मजबूत करने का शुरुआती काम इसी हफ्ते शुरू हो सकता है। हालांकि, जमीन के ऊपर मुख्य निर्माण का काम मई 2027 से पहले शुरू नहीं होगा। इस पूरी परियोजना को पूरा होने में लगभग 33 से 39 महीने का समय लग सकता है।
इस आर्च को लेकर राजनीतिक और कानूनी मोर्चे पर भारी विरोध हो रहा है। वर्जीनिया राज्य और डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया ने नेशनल पार्क सर्विस और आंतरिक विभाग के खिलाफ अदालत में मुकदमा दायर किया है। विरोध करने वालों का कहना है कि इसके निर्माण से वॉशिंगटन में सालों तक भारी ट्रैफिक जाम और यातायात बाधित रहेगा। यह रोनाल्ड रीगन वॉशिंगटन नेशनल एयरपोर्ट पर उतरने वाले विमानों के रास्ते के पास भी है, जिससे विमानों की आवाजाही पर असर पड़ सकता है। स्थानीय डेमोक्रेटिक सांसदों और ऐतिहासिक धरोहरों के जानकारों का तर्क है कि इस परियोजना के लिए कांग्रेस से उचित मंजूरी नहीं ली गई है।
वहीं दूसरी तरफ सरकार का कहना है कि कांग्रेस ने 100 साल पहले पोटोमैक नदी पर एक पुल को मंजूरी देते समय ही इस आर्च को भी स्वीकृति दे दी थी। फिलहाल, कानूनी अड़चनों के बीच एक जज इस निर्माण कार्य पर रोक लगा सकते हैं या इसे हरी झंडी दे सकते हैं।