सीजफायर की समयसीमा से पहले डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से आठ महिलाओं की रिहाई की अपील की। इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच संभावित बातचीत को लेकर हलचल तेज, विरोधाभासी खबरों के बीच वैश्विक नजरें इस अहम कूटनीतिक घटनाक्रम पर टिकी हैं।
Iran-Israel-America War: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक नया मोड़ देखने को मिला है। सीजफायर खत्म होने से ठीक पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने ईरान से एक खास अपील की है। उन्होंने वहां की सरकार से उन आठ महिलाओं को रिहा करने को कहा है, जिनको फांसी दी जानी है। ट्रंप ने मंगलवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट शेयर किया। इस पोस्ट में एक एक्टिविस्ट के दावे का स्क्रीनशॉट था, जिसमें कहा गया था कि ईरान में आठ महिलाओं को फांसी दी जा सकती है। तस्वीरें भी शेयर की गई थी, जिनमें इन महिलाओं को दिखाया गया। ट्रंप ने सीधे ईरानी नेतृत्व को संबोधित करते हुए लिखा कि अगर इन महिलाओं को रिहा किया जाता है, तो यह आने वाली बातचीत के लिए एक अच्छा और सकारात्मक कदम होगा। उन्होंने यह भी कहा कि इससे दोनों देशों के बीच भरोसा बढ़ेगा और बातचीत की शुरुआत बेहतर तरीके से हो सकेगी।
यह अपील ऐसे समय आई है जब अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance और उनकी टीम पाकिस्तान के इस्लामाबद में ईरान के प्रतिनिधियों से मिलने की तैयारी कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच तनाव कम करने को लेकर ये बातचीत काफी अहम मानी जा रही है। हालांकि, इस बैठक को लेकर स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है। कुछ रिपोर्ट्स कहती हैं कि ईरान की तरफ से बातचीत के लिए टीम भेजने की मंजूरी मिल चुकी है। लेकिन ईरान के सरकारी मीडिया ने इस बात से साफ इनकार किया है कि अभी तक कोई भी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान पहुंचा है।
एक तरफ खबरें हैं कि दोनों देशों के अधिकारी एक साथ इस्लामाबाद पहुंच सकते हैं, वहीं दूसरी तरफ ईरान की ओर से इन खबरों को खारिज किया जा रहा है। इससे यह साफ होता है कि अंदरूनी स्तर पर भी स्थिति पूरी तरह एक जैसी नहीं है। बताया जा रहा है कि इस संभावित बातचीत में कई बड़े मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। इनमें समुद्री रास्तों को फिर से खोलना, आर्थिक पाबंदियों में ढील और लंबे समय से चल रहे संघर्ष का स्थायी हल शामिल है।
जहां एक तरफ बातचीत की कोशिशें हो रही हैं, वहीं दूसरी तरफ सख्त बयान भी सामने आ रहे हैं। ट्रंप पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि अगर समझौता नहीं हुआ, तो हालात और बिगड़ सकते हैं। वहीं ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर ग़ालिबफ ने साफ कहा है कि उनका देश किसी दबाव में आकर बातचीत नहीं करेगा।