Transatlantic Crisis: साल 2026 की शुरुआत दुनिया के लिए बड़ी भू-राजनीतिक उथल-पुथल लेकर आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Trump Tariff Threat) ने एक बार फिर अपने अप्रत्याशित फैसलों से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। एक तरफ ट्रंप ग्रीनलैंड (Transatlantic Crisis) को हासिल करने के लिए यूरोप के खिलाफ व्यापार युद्ध छेड़ने पर […]
Transatlantic Crisis: साल 2026 की शुरुआत दुनिया के लिए बड़ी भू-राजनीतिक उथल-पुथल लेकर आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Trump Tariff Threat) ने एक बार फिर अपने अप्रत्याशित फैसलों से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। एक तरफ ट्रंप ग्रीनलैंड (Transatlantic Crisis) को हासिल करने के लिए यूरोप के खिलाफ व्यापार युद्ध छेड़ने पर आमादा हैं, तो दूसरी तरफ गाजा (Board of Peace Gaza) में शांति बहाली के लिए भारत को एक बड़ी भूमिका निभाने का प्रस्ताव दिया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने स्पष्ट कर दिया है कि वे ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण चाहते हैं। इसे केवल एक जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि भविष्य की सुरक्षा और संसाधनों का केंद्र बताया जा रहा है। डेनमार्क और अन्य यूरोपीय देशों ने इसे अपनी संप्रभुता पर हमला करार दिया है। इसके जवाब में ट्रंप ने यूरोपीय देशों पर 100% टैरिफ (आयात शुल्क) लगाने की चेतावनी दी है। अगर ऐसा होता है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारी गिरावट आ सकती है और महंगाई का एक नया दौर शुरू हो सकता है।
इस तनाव के बीच, ट्रंप प्रशासन ने गाजा पट्टी के पुनर्निर्माण और वहां शासन चलाने के लिए 'बोर्ड ऑफ पीस' (Board of Peace) के गठन का प्रस्ताव रखा है। व्हाइट हाउस ने भारत को आधिकारिक तौर पर इस बोर्ड में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। अमेरिका चाहता है कि भारत अपनी तटस्थ और विश्वसनीय छवि के कारण गाजा के भविष्य को सुरक्षित करने में मदद करे। फिलहाल, भारतीय विदेश मंत्रालय इस प्रस्ताव के सभी पहलुओं पर विचार कर रहा है।
इन घटनाओं के बीच ईरान ने प्रदर्शनकारियों को 72 घंटे का अंतिम अल्टीमेटम दिया है, जिससे मध्य पूर्व में हिंसा की आशंका बढ़ गई है। वहीं, रूस को भी 'बोर्ड ऑफ पीस' का न्योता मिला है, लेकिन पुतिन ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं।
हमारा देश बिकाऊ नहीं है
डेनमार्क सरकार: "हमारा देश बिकाऊ नहीं है। अमेरिका को हमारी सीमाओं और संप्रभुता का सम्मान करना चाहिए।"
भारतीय विशेषज्ञ: पूर्व राजनयिकों का मानना है कि 'बोर्ड ऑफ पीस' में शामिल होना भारत के लिए 'दोधारी तलवार' जैसा है। इससे वैश्विक कद तो बढ़ेगा, लेकिन अंतरराष्ट्रीय विवादों में फंसने का जोखिम भी रहेगा।
व्हाइट हाउस के सूत्रों के अनुसार, ट्रंप अगले 48 घंटों में यूरोपीय नेताओं के साथ एक वर्चुअल मीटिंग कर सकते हैं। वहीं, भारत में सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) इस सप्ताह के अंत तक 'बोर्ड ऑफ पीस' पर अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट दे सकती है।
बहरहाल,ग्रीनलैंड सिर्फ बर्फ से ढका हुआ द्वीप नहीं है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण वहां की बर्फ पिघल रही है, जिससे दुर्लभ खनिज और नए व्यापारिक समुद्री मार्ग खुल रहे हैं। ट्रंप की नजर इन्हीं प्राकृतिक खजानों पर है, जो भविष्य में चीन की खनिज बादशाहत को चुनौती दे सकते हैं।