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विलय दिवस से पहले UK संसद में गूंजा ‘जम्मू-कश्मीर भारत का’: अर्ली डे मोशन में संप्रभुता की पुष्टि

जम्मू-कश्मीर विलय दिवस से पहले UK संसद में अर्ली डे मोशन पेश हुआ, जिसमें भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता दोहराई गई और आतंकवाद पर चिंता जताई गई।
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Updated: 22 Oct 2026, 5:26 PM IST
Jammu Kashmir Accession Day
UK संसद में जम्मू-कश्मीर पर भारत की संप्रभुता का प्रस्ताव पेश , Photo Source@ANI

Jammu Kashmir Accession Day: जम्मू-कश्मीर विलय दिवस (Accession Day) से पहले UK संसद में पेश किए गए एक प्रस्ताव में, जम्मू-कश्मीर पर भारत गणराज्य की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को फिर से दोहराया गया है। साथ ही, इस क्षेत्र में आतंकवाद को लेकर चिंता भी जताई गई है।

'अर्ली डे मोशन' (EDM) - जिसका शीर्षक 'जम्मू-कश्मीर विलय दिवस' है - में बताया गया है कि 26 अक्टूबर 1947 को महाराजा हरि सिंह द्वारा 'इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन' (विलय पत्र) पर हस्ताक्षर किए गए थे। यह प्रस्ताव उन समुदायों के लिए इस तारीख के महत्व को भी मान्यता देता है, जो भारतीय संघ में जम्मू-कश्मीर के संवैधानिक विलय को याद करते हैं।

आतंकवाद पर जताई चिंता

इस प्रस्ताव में जम्मू-कश्मीर (जिसमें पाकिस्तान के कब्जे वाले इलाके भी शामिल हैं) में आतंकवादी घटनाओं के कारण मारे गए और घायल हुए आम नागरिकों के प्रति संवेदना व्यक्त की गई है। इसमें उन आतंकवादी घटनाओं के लगातार पड़ रहे असर पर भी प्रकाश डाला गया है, जिनकी वजह से आम नागरिकों और सुरक्षाकर्मियों की जान गई है।

प्रस्ताव में कश्मीरी पंडितों की लक्षित हत्याओं (targeted killings) पर चिंता जताई गई है। इसमें कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्सों में इस समुदाय के लोग अभी भी आतंकवाद और डराने-धमकाने की घटनाओं के प्रति असुरक्षित हैं।

भारत और UK के द्विपक्षीय संबंध रेखांकित

यह प्रस्ताव यूनाइटेड किंगडम और भारत के बीच मजबूत और रचनात्मक द्विपक्षीय संबंधों के महत्व को रेखांकित करता है। इसमें यूनाइटेड किंगडम के सांस्कृतिक, सामाजिक और नागरिक जीवन में जम्मू-कश्मीर मूल के ब्रिटिश समुदायों के योगदान को भी मान्यता दी गई है।

UK में शांतिपूर्ण आयोजनों का स्वागत करते हुए, प्रस्ताव में कहा गया है कि इस तरह के कार्यक्रम ऐतिहासिक जागरूकता, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और नागरिक भागीदारी को बढ़ावा दे सकते हैं। साथ ही, जम्मू-कश्मीर से जुड़े मुद्दों पर रचनात्मक बातचीत, सामुदायिक एकजुटता, और अंतरराष्ट्रीय नियमों तथा संप्रभु सीमाओं के सम्मान का आह्वान किया गया है।

इस प्रस्ताव के मुख्य प्रायोजक (primary sponsor) हैरो ईस्ट का प्रतिनिधित्व करने वाले कंजर्वेटिव सांसद बॉब ब्लैकमैन हैं। डेमोक्रेटिक यूनियनिस्ट पार्टी के सांसद जिम शैनन और लेबर पार्टी की सांसद गिल फर्नेस भी इस पर हस्ताक्षर करने वालों में शामिल हैं। संसदीय रिकॉर्ड के अनुसार, इस प्रस्ताव पर ब्लैकमैन ने 12 अक्टूबर 2026 को, और शैनन तथा फर्नेस ने 13 अक्टूबर 2026 को हस्ताक्षर किए थे।

Updated on:
22 Oct 2026, 5:26 PM IST
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