डेली मेल की रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिटेन की परमाणु-संचालित पनडुब्बी HMS Anson अरब सागर (उत्तरी हिस्से) में पहुंच गई है। यह टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों से लैस है, जो ईरान पर हमले की क्षमता प्रदान करती है।
ईरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिका-इजराइल को एक और बड़े देश का साथ मिल गया है। ब्रिटेन की परमाणु से चलने वाली पनडुब्बी 'HMS Anson' कथित तौर पर अरब सागर में पहुंच गई है।
डेली मेल की एक रिपोर्ट में इस बात का दावा किया गया है। स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज के पास यह तैनाती ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान तेज करने की धमकी दी है।
बताया जा रहा है कि यह जहाज 6 मार्च को ऑस्ट्रेलिया के पर्थ शहर से रवाना हुआ था। यह फिलहाल 'हॉरमुज जलडमरूमध्य के पास है।
अत्याधुनिक हथियारों से लैस 'HMS Anson' में 1,600 किमी की मारक क्षमता वाली 'टोमाहॉक ब्लॉक IV लैंड-अटैक मिसाइलें' हैं।
साथ ही इस पनडुब्बी में स्पीयरफिश हेवीवेट टॉरपीडो लगे हैं, जो इसे जबरदस्त हमलावर क्षमताएं प्रदान करते हैं। यह समुद्री तैनाती लंदन में बड़े राजनीतिक बदलावों के साथ-साथ हुई है, जहां यूनाइटेड किंगडम ने अमेरिका को ब्रिटिश सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल करने के लिए ज्यादा पहुंच देने की मंजूरी दे दी है।
जानकारी के मुताबिक, इस पनडुब्बी का इस्तेमाल हॉरमुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हुए हमलों से जुड़े ईरानी मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाने के लिए किया जाएगा। बता दें कि ब्रिटिश मंत्रियों ने शुक्रवार को अमेरिकी ऑपरेशन्स का दायरा बढ़ाने पर सहमति जताई।
ब्रिटेन ने पहले इस तरह की पहुंच को केवल उन ऑपरेशन्स तक सीमित रखा था, जिनका मकसद ईरानी मिसाइल लॉन्च को रोकना था और जिनसे सीधे तौर पर ब्रिटिश लोगों की जान या हितों को खतरा था।
भले ही ब्रिटेन ने अपनी पनडुब्बी अमेरिका-इजराइल की मदद के लिए भेज दी है, लेकिन वहां के मंत्रियों ने साफ कहा है कि यूके अपने लोगों व सहयोगियों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है, वह किसी बड़े संघर्ष में शामिल नहीं होगा।
हालांकि, ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने शुरू में कानूनी चिंताओं का हवाला देते हुए वाशिंगटन के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया था, लेकिन बाद में मध्य पूर्व में ब्रिटिश सैन्य संपत्तियों पर हमला होने के बाद वह भी इस रक्षात्मक प्रतिक्रिया में शामिल हो गए।