Ukraine Peace Summit 2024: शिखर सम्मेलन घोषणा के एक मसौदे में रूस के आक्रमण को युद्ध के तौर पर लिया गया है। जिसे रूस हमेशा से ही अस्वीकार करता आया है। इसके अलावा सम्मेलन में ज़ापोरिज़िया परमाणु संयंत्र और इसके आज़ोव सागर बंदरगाहों पर यूक्रेन के नियंत्रण को बहाल करने का आह्वान किया गया है।
Ukraine Peace Summit 2024: स्विट्जरलैंड में यूक्रेन शांति शिखर सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। कल से शुरु हुए इस सम्मेलन में अमेरिका, फ्रांस, इटली, भारत समेत दुनिया की महाशक्तियां शामिल हुई हैं। G-7 Summit 2024 के तुरंत बाद हुए इस शिखर सम्मेलन में इन देशों ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन (Vladimir Putin) का वो प्रस्ताव खारिज कर दिया जिसमें पुतिन ने यूक्रेन में सीजफायर (Russia-Ukraine War) करने की शर्तें रखीं थीं। इटली की PM जियोर्जिया मेलोनी ने ये कहते हुए इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया कि व्लादिमिर पुतिन अपनी तानाशाही से रूस और यूक्रेन को चलाना चाह रहे हैं जो कि बर्दाश्त नहीं होगा।
अंतर्राष्ट्रीय न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक शिखर सम्मेलन घोषणा के एक मसौदे में रूस के आक्रमण को 'युद्ध' (War) के तौर पर लिया गया है। जिसे रूस हमेशा से ही अस्वीकार करता आया है। इसके अलावा सम्मेलन में (Ukraine Peace Summit 2024) ज़ापोरिज़िया परमाणु संयंत्र और इसके आज़ोव सागर बंदरगाहों पर यूक्रेन के नियंत्रण को बहाल करने का आह्वान किया गया है। सम्मेलन में कई पश्चिमी नेताओं ने रूस के आक्रमण की जोरदार निंदा की और यूक्रेनी क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा में संयुक्त राष्ट्र चार्टर (UN Charter) का आह्वान किया।
बता दें कि दो दिवसीय इस सम्मेलन में परमाणु और खाद्य सुरक्षा की जरूरत और संघर्ष के दौरान यूक्रेन (Ukraine) से हटाए गए युद्धबंदियों और बच्चों की वापसी पर चर्चा हुई। व्हाइट हाउस के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने मीडिया से कहा कि कतर ने रूस से 30 या उससे ज्यादा यूक्रेनी बच्चों की उनके परिवारों में वापसी में मध्यस्थता करने में मदद की थी।
वहीं बैठक में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने कहा कि युद्ध शुरू होने के बाद से लगभग 20,000 बच्चों को परिवार या अभिभावकों की सहमति के बिना रूस या रूस के कब्जे वाले क्षेत्र में ले जाया गया है। लेकिन रूस इस बात को नहीं मानता, उसका कहना है कि उसने कमजोर बच्चों को युद्ध क्षेत्र से बचाया है।
बता दें कि पिछले 27 महीने से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए स्विट्जरलैंड में यूक्रेन शांति सम्मेलन का दो दिवसीय आयोजन चल रहा है। जिसमें दुनिया के 90 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए हैं। इनमें अमरीकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस, जर्मन चांसलर ओलाफ शॉल्ज, फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल मैक्रों सहित इटली, ब्रिटेन, भारत, कनाडा और जापान के नेता शामिल हैं। सम्मेलन में रूस को भी बुलाया गया था, लेकिन उसने वक्त की बर्बादी कहकर आने से इनकार कर दिया। चीन ने भी ऐन वक्त पर आने से मना कर दिया। चीन की रूस के साथ बढ़ती नजदीकी को लेकर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने आरोप लगाया है कि सम्मेलन को कमजोर करने के लिए चीन, रूस की मदद कर रहा है।