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Ukraine Peace Summit 2024: यूक्रेन में शांति के लिए स्विट्जरलैंड में लगा बड़े-बड़े देशों का जमावड़ा, भारत भी शामिल, रूस-चीन-अरब ने किया किनारा 

सम्मेलन में रूस को भी बुलाया गया था, लेकिन उसने वक्त की बर्बादी कहकर आने से इनकार कर दिया। चीन ने भी ऐन वक्त पर आने से मना कर दिया। वहीं सऊदी अरब ने भी इस सम्मेलन में आने से मना कर दिया।

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Big countries gather in Switzerland fo Ukraine Peace Summit 2024

Big countries gather in Switzerland fo Ukraine Peace Summit 2024

Ukraine Peace Summit 2024: पिछले 27 महीने से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध की समाप्ति के लिए (Russia-Ukraine War) शनिवार को स्विट्जरलैंड (Switzerland) में दुनिया के 90 से अधिक देशों के प्रतिनिधि पहुंचे। इनमें अमरीकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस, जर्मन चांसलर ओलाफ शॉल्ज, फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल मैक्रों सहित इटली, ब्रिटेन, भारत, कनाडा और जापान के नेता शामिल हैं। सम्मेलन में रूस (Russia) को भी बुलाया गया था, लेकिन उसने वक्त की बर्बादी कहकर आने से इनकार कर दिया। चीन (China) ने भी ऐन वक्त पर आने से मना कर दिया। वहीं सऊदी अरब ने भी इस सम्मेलन में आने से मना कर दिया। चीन की रूस के साथ बढ़ती नजदीकी को लेकर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की (Volodymyr Zelenskyy) ने आरोप लगाया है कि सम्मेलन को कमजोर करने के लिए चीन, रूस की मदद कर रहा है। यूक्रेन की पहल पर हो रहे इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य यूक्रेन के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाना है।

भारत भी Ukraine Peace Summit 2024 में शामिल

इस सम्मेलन में (Ukraine Peace Summit 2024) इनमें उन देशों को भी आमंत्रित किया गया है, जिनके रूस से अच्छे संबंध हैं। इनमें भारत, तुर्की और दक्षिण अफ्रीका प्रमुख हैं। हालांकि इन देशों ने मंत्री स्तर के प्रतिनिधि नहीं भेजे हैं। आंकड़ों के मुताबिक फरवरी 2022 से जारी युद्ध (Russia-Ukraine War) में अब तक 11 हजार से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है और 20 हजार के करीब घायल हुए हैं। हालांकि वास्तविक हताहतों की संख्या इससे काफी ज्यादा बताई जा रही है।

रूस का दावा, यूक्रेन के 9 फीसदी हिस्से पर कब्जा

रूस का दावा है कि उसने यूक्रेन के 9 फीसदी हिस्से को अपने कब्जे में ले लिया है। रूस के मुताबिक खेरसॉन, जैपोर्जिया, लुहांस्क, दोनेत्स्क और अवदिव्का शहर पर उसका कब्जा है, हालांकि यूक्रेन इससे इनकार करता है। इन क्षेत्रों में रूसी भाषी लोगों की संख्या ज्यादा है।

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रूस ने कहा, यूक्रेन शर्तें मान ले तो युद्ध रुक जाएगा

सम्मेलन शुरू होने से एक दिन पहले शुक्रवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) ने यूक्रेन युद्ध समाप्त करने की शर्तें दोहराई। पहली शर्त यूक्रेन नाटो में शामिल न होने की सहमति दे। दूसरी शर्त यूक्रेन उन चार प्रांतों को रूस को सौंप दे, जिन पर उसका दावा है। ये प्रांत हैं दोनेत्स्क, लुहांस्क, खेरसॉन और जापोरजिया। इतना ही नहीं पुतिन ने यूक्रेन को क्रीमिया पर भी दावा छोडऩे को कहा है, जिस पर 2014 में रूस ने कब्जा किया था। पुतिन ने कहा, इन चारों प्रांतों से यूक्रेन अपनी सेनाओं को बुला ले और नाटो (NATO) में शामिल होने का इरादा छोड़ दे तो उसी पल संघर्ष विराम के लिए वार्ता शुरू हो जाएगी।

Russia-Ukraine War से दो वर्ष में 175 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन

एक शोध में सामने आया है कि रूस-यूक्रेन युद्ध (Russia-Ukraine War) के दो वर्षों की जलवायु लागत 175 देशों की ओर से वार्षिक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन से भी ज्यादा थी। युद्ध आधारित जलवायु प्रभावों को लेकर अब तक के सबसे बड़े विश्लेषण में सामने आया कि रूस के आक्रमण से 175 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड पैदा हुआ है। इसमें सैन्य हमले, उड़ानें, पलायन के अलावा भावी पुनर्निर्माण से जुड़ी कार्बन लागत भी है। 175 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड एक वर्ष में 9 करोड़ कार चलाने के बराबर है। कार्बन की यह मात्रा 2022 में नीदरलैंड, वेनेजुएला और कुवैत आदि देशों में उत्सर्जित कार्बन के बराबर है।

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युद्ध से दोनों तरफ तबाही

152 अरब डॉलर का आर्थिक नुकसान हुआ है यूक्रेन को। 486 अरब डॉलर चाहिए पुनर्निमाण और नुकसान की भरपाई के लिए।

-यूक्रेन में बेरोजगारी दर 30 फीसदी हो गई, जो युद्ध से पहले 10 फीसदी थी।

-28 फीसदी घटकर 425.1 अरब डॉलर रह गया है रूस का निर्यात, जो पिछले वर्ष 588.3 अरब डॉलर था। यूरोप को निर्यात 68 फीसदी गिरा।

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