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UN में टूटेगा 81 साल का रिकॉर्ड? पहली महिला महासचिव बनने की रेस में ये दो दिग्गज महिलाएं सबसे आगे

UN Secretary General Candidates: संयुक्त राष्ट्र के 81 साल के इतिहास में क्या पहली बार कोई महिला महासचिव बनेगी? साल 2026 में होने वाले चुनाव के लिए रेबेका ग्रिनस्पैन, मिशेल बाचलेट, राफेल ग्रॉसी और मैकी सॉल के बीच कड़ा मुकाबला है। जानें कौन हैं ये दिग्गज दावेदार और किसका पलड़ा है भारी।
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Updated: 21 Apr 2026, 8:46 PM IST
Michelle Bachelet
चिली की पूर्व राष्ट्रपति मिशेल बाचलेट (Photo - IANS)

UN Secretary General Election 2026: क्या दुनिया की सबसे बड़ी संस्था संयुक्त राष्ट्र (UN) को अपने 81 साल के इतिहास में पहली बार कोई महिला मुखिया मिलने वाली है? अब तक इस पद पर बैठे सभी 9 महासचिव पुरुष ही रहे हैं, लेकिन इसी साल होने वाले चुनाव में यह इतिहास बदल सकता है। इस बार दो ताकतवर महिलाओं, रेबेका ग्रिनस्पैन और मिशेल बाचलेट ने दावेदारी पेश कर हलचल मचा दी है।

हालांकि, यह मुकाबला कड़ा है क्योंकि इनके सामने दो दिग्गज पुरुष उम्मीदवार भी मैदान में हैं। इनमें एक हैं परमाणु मामलों के एक्सपर्ट राफेल ग्रॉसी और दूसरे हैं सेनेगल के पूर्व राष्ट्रपति मैकी सॉल। इन चारों दिग्गजों के बीच के मुकाबले का फैसला इसी साल हो जाएगा, जिसके बाद नया महासचिव 1 जनवरी 2027 से अपना कार्यभार संभालेगा। पूरी दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि इस बार जीत किसकी होगी, अनुभव की या बदलाव की।

राफेल ग्रॉसी: UNSC स्थायी सदस्यों पर मजबूत पकड़

अर्जेंटीना के 65 वर्षीय अनुभवी राजनयिक राफेल ग्रॉसी इस दौड़ में सबसे आगे माने जा रहे हैं। पिछले छह वर्षों से वे अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के महानिदेशक के रूप में कार्यरत हैं। ग्रॉसी को एक हाइपरएक्टिव और संकटों के बीच रास्ता निकालने वाले नेता के रूप में देखा जाता है।

उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि यूक्रेन युद्ध के दौरान रूस के कब्जे वाले जापोरिज्जिया परमाणु ऊर्जा संयंत्र में IAEA की टीम तैनात करना रही है। ग्रॉसी ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी कई जटिल वार्ताओं का नेतृत्व किया है। उनकी पकड़ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस पर काफी मजबूत मानी जाती है, जो इस पद के लिए अनिवार्य है। वे आठ बच्चों के पिता हैं और अंग्रेजी, स्पेनिश, फ्रेंच व इतालवी भाषाओं के जानकार हैं।

रेबेका ग्रिनस्पैन: बदलाव की समर्थक

70 वर्षीय रेबेका ग्रिनस्पैन कोस्टा रिका की पूर्व उपराष्ट्रपति हैं और वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन (UNCTAD) की प्रमुख हैं। यदि वे चुनी जाती हैं, तो वे संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में पहली महिला महासचिव होंगी। ग्रिनस्पैन खुद को एक सुधारवादी नेता के रूप में पेश कर रही हैं।

उनका जन्म उन माता-पिता के घर हुआ था जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यूरोप से भागकर आए थे, यही वजह है कि वे शांति और मानवाधिकारों को प्राथमिकता देती हैं। उन्होंने अपनी निष्पक्षता बनाए रखने के लिए सितंबर तक अपने आधिकारिक कर्तव्यों से दूरी बना ली है। वे मानती हैं कि उनका अनुभव संयुक्त राष्ट्र को अधिक चुस्त और प्रभावी बनाने में मदद करेगा।

मिशेल बाचलेट: विवादों और अनुभव का मिश्रण

चिली की दो बार राष्ट्रपति रह चुकीं 74 वर्षीय मिशेल बाचलेट भी इस रेस में शामिल हैं। वे संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त और 'यूएन विमेन' की पहली कार्यकारी निदेशक रह चुकी हैं। हालांकि, उनकी राह में कुछ मुश्किलें भी हैं। चिली की वर्तमान दक्षिणपंथी सरकार ने उनका समर्थन वापस ले लिया है, लेकिन उन्हें ब्राजील और मैक्सिको का साथ मिल रहा है।

अमेरिका के कुछ राजनीतिक हलकों में उनकी आलोचना भी हो रही है। उन पर आरोप है कि उन्होंने चीन में उइगर मुस्लिमों के मुद्दे पर कड़ा रुख नहीं अपनाया। साथ ही, गर्भपात के अधिकार का समर्थन करने के कारण उन्हें अमेरिकी रूढ़िवादियों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। बावजूद इसके, उनके पास शासन और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों को चलाने का विशाल अनुभव है।

मैकी सॉल: विकासशील देशों की आवाज

सेनेगल के पूर्व राष्ट्रपति मैकी सॉल अपनी दावेदारी के साथ अफ्रीका और विकासशील देशों का पक्ष मजबूती से रख रहे हैं। 64 वर्षीय सॉल एक भूविज्ञानी हैं और 12 वर्षों तक सेनेगल के राष्ट्रपति रहे हैं। उन्होंने अपने कार्यकाल में बड़े बुनियादी ढांचे के निर्माण और कर्ज के बोझ तले दबे गरीब देशों की मदद करने पर जोर दिया है।

सॉल संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार के बड़े पैरोकार हैं, ताकि विकासशील देशों को वहां स्थायी सीटें मिल सकें। उन्हें बुरुंडी ने नामांकित किया है, हालांकि अफ्रीका के भीतर ही उन्हें नाइजीरिया जैसे देशों से पूरी तरह समर्थन मिलना अभी बाकी है। अगर वे चुने जाते हैं, तो वे बुतरोस घाली और कोफी अन्नान के बाद इस पद पर बैठने वाले तीसरे अफ्रीकी होंगे।

Updated on:
21 Apr 2026, 8:46 PM IST
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