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20 साल बाद अब बंद होगा इराक में UN का राजनीतिक मिशन, जानिए क्या है वजह? 

साल 2014 में जब इस्लामिक स्टेट समूह (ISIS) ने इराक और सीरिया के बड़े हिस्से में खिलाफत की घोषणा की और दुनिया भर से हजारों समर्थकों को आकर्षित किया। तब अमेरिका ने इन दोनों देशों में शांति स्थापित करने के लिए सैन्य कार्रवाई की थी।

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UN's political mission in Iraq will be closed

संयुक्त राष्ट्र यानी UN इराक में चल रहे राजनीतिक मिशन को 20 साल बंद करने जा रहा है। इसके लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने बीते शुक्रवार को सर्वसम्मति से फैसला लिया कि इराक (Iraq) में UN 2025 के आखिरी में यानी 31 दिसंबर 2025 को देश छोड़ देगा। परिषद को लिखे एक लेटर में, इराकी प्रधान मंत्री मोहम्मद शिया अल-सुदानी (Mohammed Shia' Al Sudani) ने इराक के लिए संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (UNAMI) को बंद करने का आह्वान किया था। अल-सुदानी ने कहा कि मिशन ने विविध चुनौतियों पर काबू पा लिया है और इराक में राजनीतिक मिशन रखने का आधार अब मौजूद नहीं है।

ISIS से निपटने को था मिशन 

UNSC के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस (Antonio Guterres)से 31 दिसंबर, 2024 तक इराकी सरकार के सुझाव से इस बारे में आगे की कार्यवाही करेगा। ताकि यहां से UN अपने कार्यों को ट्रांसफर करने और कर्मचारियों और संपत्तियों को वापस लेना शुरू कर सके। परिषद ने कहा कि वह इराक के निरंतर स्थिरीकरण प्रयासों का समर्थन करता है, जिसमें इस्लामिक स्टेट समूह (ISIS) और अल-कायदा चरमपंथियों और उनके सहयोगियों के खिलाफ चल रही लड़ाई भी शामिल है।

ISIS के कब्जे के बाद इराक में शुरू हुआ था ये मिशन 

साल 2014 में जब इस्लामिक स्टेट समूह (ISIS) ने इराक और सीरिया के बड़े हिस्से में खिलाफत की घोषणा की और दुनिया भर से हजारों समर्थकों को आकर्षित किया। तब अमेरिका ने इन दोनों देशों में शांति स्थापित करने के लिए सैन्य कार्रवाई की थी। साल 2017 में इराक में और 2019 में सीरिया में अमेरिकी सेना ने इन लड़कों को मार गिराया था। हालांकि अभी भी ISIS के स्लीपर सेल दोनों देशों में बने हुए हैं।

अब ISIS से निपट लेगा इराक

परिषद की यह कार्रवाई तब हुई जब इराक भी ISIS से लड़ने के लिए बनाए गए सैन्य गठबंधन को खत्म करने की मांग कर रहा है। लगभग 2,500 अमेरिकी सैनिक देश भर में फैले हुए हैं, खासकर बगदाद और उत्तर में सैन्य प्रतिष्ठानों में। इराकी प्रधान मंत्री मोहम्मद शिया अल-सुदानी ने तर्क दिया है कि इराकी सुरक्षा बल देश में बाकी बचे ISIS आतंकियों से निपट लेगा। इसलिए इस ऑपरेशन की अब जरूरत नहीं है।

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