
US Airstrike Near Shadegan: मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) इस वक्त एक बेहद खतरनाक मोड़ पर खड़ा है। ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव अब सीधे सैन्य टकराव में बदल चुका है। ईरान द्वारा कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाए जाने के कुछ ही घंटों बाद, अमेरिकी वायुसेना ने ईरान की सीमा के भीतर घुसकर भीषण बमबारी की है। इस जवाबी कार्रवाई से पूरे खाड़ी क्षेत्र में युद्ध की चिंगारी भड़क उठी है और वैश्विक बाजार में भी हड़कंप मच गया है।
ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी 'तस्नीम' ने प्रांत के सुरक्षा उपराज्यपाल के हवाले से पुष्टि की है कि अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने दक्षिण-पश्चिमी ईरान के खुज़ेस्तान प्रांत में स्थित शादेगान (Shadegan) शहर के पास एक रणनीतिक ठिकाने पर हवाई हमला किया है।
हमला इतना भीषण था कि धमाकों की गूंज दूर-दूर तक सुनी गई। ईरानी प्रशासन के अनुसार, प्रभावित इलाके में आपातकालीन और राहत टीमों को तुरंत रवाना कर दिया गया है। फिलहाल नुकसान और हताहतों के सटीक आंकड़ों का इंतजार किया जा रहा है, लेकिन ईरान की संप्रभुता पर अमेरिका का यह सीधा हमला एक बड़े युद्ध का न्योता माना जा रहा है।
दरअसल, अमेरिका की यह आक्रामक कार्रवाई ईरान के उस दुस्साहस का जवाब है, जिसने तहलका मचा दिया था। इससे ठीक पहले ईरान की सेना ने सरकारी प्रसारक IRIB पर आधिकारिक बयान जारी कर दावा किया था कि उसने कुवैत में स्थित दो प्रमुख अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर 'विनाशकारी ड्रोन हमले' (Large-scale Drone Attacks) किए हैं।
कैंप अल अदिरी (Camp Al Adiri): ईरान के आत्मघाती ड्रोनों ने यहां अमेरिकी सेना के मुख्य गोला-बारूद डिपो (Ammunition Depot) को निशाना बनाया, जिससे भारी तबाही की आशंका है।
अली अल सलेम एयर बेस (Ali Al Salem Air Base): यहां तैनात अमेरिका के अत्याधुनिक पैट्रियट मिसाइल डिफेंस सिस्टम (Patriot Air-defence Radars) और रडार प्रणालियों को मटियामेट करने का दावा किया गया है।
यह कोई पहली बार नहीं है जब अमेरिका और ईरान आमने-सामने हैं, लेकिन ईरान की धरती पर सीधे अमेरिकी हमला और कुवैत जैसे तटस्थ देश में अमेरिकी बेस का निशाना बनना इस संघर्ष को एक नए और खतरनाक स्तर पर ले जाता है।
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर संकट: खुज़ेस्तान प्रांत और शादेगान का इलाका रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। यह क्षेत्र फारस की खाड़ी के करीब है, जहाँ से दुनिया का एक-तिहाई तेल गुजरता है। इस टकराव से वैश्विक कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है, जिसका सीधा असर भारत सहित पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
कुवैत की चिंताएं: कुवैत पारंपरिक रूप से इस क्षेत्र में शांति का पैरोकार रहा है। उसकी धरती का इस्तेमाल अमेरिकी सेना द्वारा ईरान के खिलाफ किए जाने और अब ईरान द्वारा कुवैत पर हमला करने से खाड़ी देशों (GCC) में सुरक्षा को लेकर खौफ का माहौल है।
पैट्रियट सिस्टम की नाकामी पर सवाल: अगर ईरान का यह दावा सच साबित होता है कि उसने अमेरिका के पैट्रियट रडार को ध्वस्त कर दिया है, तो यह अमेरिकी सैन्य तकनीक की साख पर एक बड़ा सवालिया निशान होगा।
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि यदि संयुक्त राष्ट्र (UN) और वैश्विक शक्तियों ने तुरंत हस्तक्षेप नहीं किया, तो यह छिटपुट एयरस्ट्राइक एक पूर्ण विकसित क्षेत्रीय युद्ध में तब्दील हो सकती है, जिसकी लपेट में कई और देश आ सकते हैं। फिलहाल, वॉशिंगटन और तेहरान दोनों ही तरफ से अगले कदमों को लेकर सैन्य बैठकें जारी हैं।