
Donald Trump citizenship order: अमेरिका के एक संघीय न्यायाधीश ने बुधवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ताजा आदेश को लागू करने पर रोक लगा दी है। यह आदेश जन्मसिद्ध नागरिकता को सीमित करने के लिए जारी किया गया था।
मैरीलैंड की जिला अदालत की जज डेबोरा बोर्डमैन ने यह फैसला सुनाया। उन्होंने साफ कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही इस मुद्दे पर फैसला दे चुका है।
जज बोर्डमैन ने इस मामले में सुनवाई के बाद अपने आदेश में कहा- सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही तय कर दिया है कि वर्ग कार्रवाई में शामिल बच्चे जन्म से ही अमेरिकी नागरिक हैं। इसलिए नया आदेश भी लगभग निश्चित रूप से असंवैधानिक है।
उन्होंने स्टेट डिपार्टमेंट, होमलैंड सिक्योरिटी और सोशल सिक्योरिटी प्रशासन को निर्देश दिया कि वे इन बच्चों की नागरिकता को मान्यता देने से इनकार न करें या उसमें बाधा न डालें।
ट्रंप ने अगस्त में नया आदेश जारी किया था। इसमें खास तौर पर बर्थ टूरिज्म को निशाना बनाया गया। इसमें वे महिलाएं शामिल हैं जो बच्चे को अमेरिकी नागरिकता दिलाने के लिए अमेरिका आती हैं।
आदेश में कहा गया था कि अगर माता-पिता में से कोई विदेशी सरकार के लिए काम करता हो, धोखाधड़ी करता हो या दुश्मन विदेशी माना जाता हो तो बच्चे को नागरिकता नहीं मिलेगी।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने जून में ट्रंप के पुराने आदेश को रद्द कर दिया था। कोर्ट ने 14वें संशोधन के नागरिकता खंड का हवाला देते हुए कहा था कि अमेरिका में जन्मे और उसके अधिकार क्षेत्र में आने वाले बच्चे नागरिक हैं।
न्याय विभाग के वकीलों ने दलील दी कि नया आदेश पुराने से ज्यादा संकीर्ण है। उन्होंने कहा कि एजेंसियां अभी सार्वजनिक दिशानिर्देश जारी नहीं कर पाई हैं। इसलिए मुकदमा जल्दबाजी में है। लेकिन जज ने साफ कहा कि यह सभी बच्चों पर लागू होता है, चाहे वे कभी भी पैदा हुए हों। इसलिए तुरंत रोक जरूरी है।
सीएएसए और असाइलम सीकर एडवोकेसी प्रोजेक्ट जैसे संगठनों ने इस रोक का स्वागत किया। असाइलम सीकर एडवोकेसी प्रोजेक्ट की सह-कार्यकारी निदेशक कॉनचिता क्रूज ने रॉयटर्स से कहा कि प्रवासी परिवारों को बार-बार अदालत में आकर अपने बच्चों के अधिकारों की रक्षा नहीं करनी चाहिए।