मिडल ईस्ट में तनाव: अमेरिकी विमानवाहक पोत की तैनाती पर भड़का ईरान, कहा- हमला हुआ तो भुगतना होगा अंजाम। जानिए 18 दिनों के इंटरनेट ब्लैकआउट के बीच क्या हैं तेहरान के हालात।
Middle East Tension: मध्य-पूर्व (मिडिल ईस्ट) में युद्ध के बादल एक बार फिर मंडराने लगे हैं। अमेरिका ने अपने शक्तिशाली परमाणु विमानवाहक पोत USS Abraham Lincoln और तीन सहायक युद्धपोतों को इस क्षेत्र में तैनात कर दिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, इस तैनाती का उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम ईरान को दी गई कड़ी चेतावनी के रूप में भी देखा जा सकता है।
ईरान में दिसंबर 2025 से बड़े विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं, जो आर्थिक कठिनाइयों और राजनीतिक असंतोष से शुरू हुए थे। सुरक्षा बलों ने इन प्रदर्शनों को कड़े तरीके से दबाया। अमेरिकी मानवाधिकार संगठन HRANA के अनुसार, अब तक लगभग 5,848 लोग मारे गए और 41,283 से अधिक लोग गिरफ्तार किए गए हैं। इंटरनेट बंदी 18 दिन से जारी है, जो ईरान के इतिहास का सबसे लंबा ब्लैकआउट है।
उधर, ईरान ने चेतावनी दी है कि किसी भी विदेशी हस्तक्षेप का पछतावा कराने वाला जवाब दिया जाएगा। लेबनान स्थित संगठन हिजबुल्लाह ने भी कहा कि यदि ईरान पर हमला हुआ, तो पूरा क्षेत्र युद्ध की आग में झुलस सकता है। वहीं, यूएई ने स्पष्ट कर दिया कि उसकी धरती का इस्तेमाल ईरान पर हमले के लिए नहीं होने दिया जाएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका की यह तैनाती रणनीतिक संकेत देने के उद्देश्य से भी है, ताकि ईरान और अन्य क्षेत्रीय देशों को अमेरिकी सैन्य क्षमता का अंदाजा हो। वैश्विक समुदाय इस तनाव को नजदीक से देख रहा है, क्योंकि किसी भी छोटी चूक से क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाएं बढ़ सकती हैं।