US Iran Ceasefire: इजरायल ने सीजफायर में पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका पर सवाल उठाया है। भारत में इजरायल के राजदूत, रूवेन अजार ने इस मामले पर बात करते हुए कहा कि अमेरिका के पास पाकिस्तान पर भरोसा करने के अपने कारण है।
US Iran Ceasefire: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच हाल ही में दो सप्ताह का सीजफायर घोषित किया गया है। इस बीच कूटनीतिक स्तर पर कई देश मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। पाकिस्तान भी उन्हीं देशों में से एक है जिसका इस सीजफायर के पीछे बड़ा हाथ माना जा रहा है। हालांकि इजरायल का पाकिस्तान को लेकर अभी भी पुराना रुख ही बरकरार है और इजरायल ने एक बार फिर साफ किया है कि वो पाकिस्तान पर भरोसा नहीं करता है। इजरायल के भारत में राजदूत रेवेन अजार ने पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उसे अविश्वसनीय बताया है। उन्होंने कहा कि इजरायल पाकिस्तान को एक भरोसेमंद प्लेयर नहीं मानता। अजार ने यह भी कहा कि पाकिस्तान को इस प्रक्रिया में शामिल करने के अमेरिका के पास अपने कारण है।
राजधानी दिल्ली में मीडिया बातचीत के दौरान इजरायली राजदूत ने यह स्पष्ट कहा कि पाकिस्तान को मध्यस्थ के रूप में गंभीरता से नहीं लिया जा सकता। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अमेरिका पहले भी कतर और तुर्की जैसे देशों के साथ काम कर चुका है, जिन्हें इजरायल समस्याग्रस्त मानता है। अजार के अनुसार, इजरायल का मुख्य फोकस अमेरिका के साथ तालमेल बनाए रखना है ताकि अंतिम परिणाम उनके रणनीतिक हितों के अनुसार हो। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में एक डेलिगेशन पाकिस्तान पहुंचने वाला है।
अमेरिका और ईरान के बीच घोषित सीजफायर को लेकर उम्मीद जताई जा रही है कि यह एक दीर्घकालिक समझौते का आधार बन सकता है। अजार ने कहा कि इजरायल चाहता है कि इस प्रक्रिया के जरिए ईरान के परमाणु कार्यक्रम और बैलिस्टिक मिसाइल उत्पादन जैसे दो बड़े खतरों को खत्म किया जाए। उन्होंने यह भी दावा किया कि सैन्य कार्रवाई के बाद अब इजरायल कूटनीति की ओर बढ़ रहा है। हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जरूरत पड़ी तो सैन्य विकल्प फिर से अपनाया जा सकता है।
हालांकि सीजफायर के बावजूद ईरान और इजरायल में तनाव कम नहीं हुआ है। सीजफायर के बावजूद इजरायल ने हाल ही में लेबनान में बड़े हमले किए, जिनमें सैकड़ों लोगों के मारे जाने की खबर सामने आई है। इसके जवाब में तेहरान ने कड़ी प्रतिक्रिया की चेतावनी दी है। ईरान ने आरोप लगाया है कि लेबनान में इजरायल के हमले इस समझौते को कमजोर कर रहे हैं। वहीं अमेरिका और इजरायल का कहना है कि लेबनान इस सीजफायर का हिस्सा नहीं है।
सीजफायर की सबसे बड़ी चुनौती ईरान का परमाणु कार्यक्रम बना हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान यूरेनियम संवर्धन रोकने को तैयार है, लेकिन ईरान ने इसे खारिज कर दिया है। ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर कालीबाफ ने कहा कि उनका देश अपने परमाणु कार्यक्रम को जारी रखेगा। उन्होंने अमेरिका और इजरायल पर समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच गहरा मतभेद बना हुआ है। ऐसे में सीजफायर को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है कि क्या यह युद्धविराम तय समय तक लागू रहेगा या उससे पहले ही फिर से युद्ध के हालात पैदा हो जाएंगे।