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US-Iran Deal: अमेरिका-ईरान के बीच समझौते को लेकर अभी भी कई सवाल, क्यों नहीं बन पा रही बात, नई वजह जानें

US Iran Negotiations: अमेरिका-ईरान के बीच समझौते की बातें पेचीदा व घुमावदार मालूम हो रही हैं। इस समझौते की कई बातें धुंधली हैं और लोगों के समझ में नहीं आ रही हैं।

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Jun 15, 2026
US-Iran Deal News
अमेरिकी प्रेसीडेंट डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा अली खामेनेई। ( फोटो: @ani_digital)

US-Iran Nuclear Deal : अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते की बहुत सी बातें अभी भी अबूझ पहेली बनी हुई हैं। आलम यह है कि ऐसा लगता है कि सबकुछ फाइनल हो गया है, मगर पेचदार और घुमावदार बातें ऐसी हैं कि आम आदमी के समझ में ही नहीं आता कि किसको क्या छूट है और क्या पाबंदी लगाई गई है। मीडिया रिपोटर्स के अनुसार ईरान के साथ हुए ट्रंप के समझौते की असली परीक्षा तभी होगी जब वास्तव में लड़ाई रुक जाएगी। असल में इस समझौते के अनुसार 60 दिनों के लिए लड़ाई रोक दी जाएगी और होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल परिवहन मार्गों पर ईरान का नियंत्रण समाप्त हो जाएगा। साथ ही अमेरिका की ओर से लगाई गई नौसैनिक नाकाबंदी भी खत्म हो जाएगी। अहम बात यह है कि समझौते के बारे में जानकारियों की कमी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

अमेरिका-ईरान समझौते से उठता पहला सवाल

क्या होर्मुज जलडमरूमध्य का खुलना और नाकाबंदी का अंत केवल युद्ध-पूर्व की यथास्थिति की वापसी का संकेत है, क्योंकि परमाणु संबंधी महत्वपूर्ण प्रश्न अभी भी अनसुलझा है ?

यूएस-ईरान समझौते से उठता दूसरा सवाल

क्या ट्रंप, ओबामा प्रशासन की ओर से किए गए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थित और निगरानी वाले परमाणु समझौते से बेहतर डील करने के करीब है , जिसका ईरान तब तक पालन कर रहा था जब तक कि ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में इसे रद्द नहीं कर दिया ?

अमेरिका-ईरान समझौते से उठता तीसरा सवाल

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ईरान की पारंपरिक सैन्य क्षमता में गिरावट के अलावा, क्या एक ऐसा युद्ध, जिसे अधिकतर अमेरिकी नहीं चाहते थे और जिसने वैश्विक स्तर पर भारी कठिनाई उत्पन्न की, ने कोई ऐसा परिणाम हासिल किया जो इसकी लागत को उचित ठहराता हो ?

यूएस -ईरान समझौते से उठता चौथा सवाल

सबसे अहम मुद्दा जिसकी वजह से युद्ध शुरू हुआ, वह है ईरान का परमाणु कार्यक्रम। ईरान के पास मौजूद यूरेनियम भंडार है और वह अक्सर कहता रहा है कि परमाणु हथियार नहीं चाहता, इसलिए इस बात का नया आश्वासन कि वह ऐसा नहीं
करेगा,इसकी क्या गारंटी है।

अमेरिका-ईरान समझौते से उठता पांचवां सवाल

अमेरिका की ओर से ईरान की ओर से हिजबुल्लाह जैसे आतंकवादी संगठनों को दिए जा रहे समर्थन को कम करने या उसके मिसाइल कार्यक्रमों पर रोक लगाने तथा युद्ध से खाली हो चुके शस्त्रागार को फिर से भरने के प्रयासों के बारे में बहुत कम चर्चा हुई। ये दोनों मुद्दे इजरायल के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं और यदि इनका समाधान नहीं हुआ तो यह समझौता टूट सकता है।

यूएस-ईरान समझौते से उठता छठा सवाल

समझौते के ज्ञापन के अर्थ को लेकर अलग-अलग धारणाएं सामने आ रही हैं। अमेरिका का कहना है कि ईरानी संपत्तियों की रिहाई या प्रतिबंधों को हटाने का कोई भी कदम ईरान के सहयोग पर ही निर्भर करेगा। तेहरान ने कहा है कि 60 दिन की समय सीमा तभी शुरू होगी, जब वाशिंगटन अपने जमे हुए अरबों डॉलर के फंड का भुगतान करना शुरू करेगा। अमेरिका और ईरान के बीच अविश्वास इतना गहरा है और इजरायल और तेहरान के बीच तनाव इतना अधिक है कि अगर यह समझौता किसी समझौते पर हस्ताक्षर होने तक कायम रहता है तो यह एक बड़ी उपलब्धि होगी।

अमेरिका-ईरान समझौते से उठता सातवां सवाल

इस संबंध में अहम बात यह है कि उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने मीडिया को बताया है कि समझौते में यह आश्वासन शामिल है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार का उत्पादन, खरीद या उत्पादन नहीं करेगा। जबकि परमाणु भंडार युद्ध समाप्त करना समझौते का एक अहम हिस्सा है और ट्रंप के एजेंडे का अहम पॉइंट है। सवाल यह है कि ईरान के समृद्ध यूरेनियम भंडार का क्या होगा, जिसमें 970 पाउंड संवर्धित यूरेनियम भी शामिल है। अंतरराष्ट्रीय निरीक्षकों का कहना है कि यह 10 परमाणु हथियार बनाने के लिए पर्याप्त है। परमाणु विशेषज्ञों के अनुसार ईरान के पास अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम है।