US Iran Nuclear Talks: अमेरिका और ईरान जेनेवा में तीसरे दौर की परमाणु वार्ता कर रहे हैं। ओमान की मध्यस्थता में चल रही बातचीत से मध्य पूर्व में शांति की उम्मीद है, लेकिन सैन्य दबाव जारी है।
US Iran Nuclear Talks: मध्य पूर्व में अमेरिकी फौज की तैनाती के बीच जंग के मुहाने पर खड़े अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड के जेनेवा (Geneva Talks) में तीसरे दौर की अप्रत्यक्ष परमाणु वार्ता (US Iran Nuclear Talks) सुलगते शोलों पर बर्फ की चादर बिछाने की कोशिश के समान है। ओमान की मध्यस्थता में आयोजित इस वार्ता में ईरान के परमाणु कार्यक्रम (Iran Uranium Enrichment), यूरेनियम संवर्धन की सीमा, स्टॉकपाइल और प्रतिबंधों में राहत जैसे मुद्दे प्रमुख हैं। दोनों पक्षों ने नये और रचनात्मक विचारों के प्रति खुलापन दिखाया है, लेकिन मध्य पूर्व में अमेरिकी फौज की तैनाती से तनाव चरम पर है। ईरान ने अपनी नई प्रस्ताव भेजे हैं, जिन्हें ओमान के विदेश मंत्री ने अमेरिकी टीम को सौंपा।
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने चेतावनी दी है कि युद्ध में कोई विजेता नहीं होगा और यह विनाशकारी साबित होगा। दूसरी ओर, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप कूटनीति को प्राथमिकता दे रहे हैं। ओमान ने बताया कि अमेरिका अभूतपूर्व खुलापन दिखा रहा है। वार्ता में IAEA प्रमुख भी शामिल हुए हैं। ये वार्ताएं पिछले दौरों के आधार पर हो रही हैं, जहां ईरान ने नागरिक उपयोग के लिए यूरेनियम संवर्धन पर जोर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि समझौता हो सकता है, जिसमें ईरान संवर्धन फ्रीज करे और अमेरिका प्रतिबंध हटाए। हालांकि, अमेरिकी दबाव में युद्ध की आशंका भी बनी हुई है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय में मिश्रित प्रतिक्रियाएं हैं। चीन ने संयम बरतने और बातचीत से हल निकालने की अपील की है। विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप प्रशासन 'मेक या ब्रेक' मोमेंट पर है, जहां कूटनीति या सैन्य कार्रवाई का फैसला हो सकता है। ईरान खुद को आतंकवाद का शिकार बताकर अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। ऐसे में वार्ताओं के परिणाम पर नजर रखी जा रही है।
बहरहाल, अगर समझौता होता है तो मध्य पूर्व में तनाव कम हो सकता है, वरना क्षेत्रीय संघर्ष बढ़ सकता है। अगले अपडेट्स में IAEA की रिपोर्ट और दोनों पक्षों के बयान महत्वपूर्ण होंगे। यह बातचीत सिर्फ परमाणु मुद्दे तक सीमित नहीं। इसमें मिसाइल कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा और इजरायल की चिंताएं भी जुड़ी हैं। अमेरिकी सैन्य बिल्डअप (एयरक्राफ्ट कैरियर और युद्धपोत) दबाव बनाने का तरीका है, जबकि ईरान लंबे समय से प्रतिबंधों से जूझ रहा है।