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चीन ने लगाया निर्यात प्रतिबंध तो भड़क गया जापान, गुस्से में कह दी ये बड़ी बात

Tension : चीन ने ताइवान विवाद के बीच जापानी कंपनियों पर 'रेयर अर्थ' समेत दोहरे उपयोग वाले सामान के निर्यात पर बैन लगा दिया है।

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भारत

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MI Zahir

Feb 25, 2026

China Japan relations

जापान और चीन में तनाव। ( फोटो: AI)

Diplomatic Conflict : जापान और चीन (China Japan relations) के बीच कूटनीतिक और व्यापारिक तनाव में बहुत ज्यादा गर्मागर्मी आ गई है। चीन की ओर से हाल ही में जापान की 20 रक्षा-संबंधित कंपनियों पर 'दोहरे उपयोग' (Dual-use) वाले सामान के निर्यात पर रोक लगाने (Rare earth export ban)के फैसले से टोक्यो नाराज हो गया है। जापान ने इस कदम का सख्त विरोध करते हुए बीजिंग से ये प्रतिबंध तुरंत वापस लेने की मांग की है। एक वरिष्ठ जापानी अधिकारी ने क्योडो न्यूज के हवाले से पुष्टि की है कि जापान सरकार ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अख्तियार किया है। जापान के उप मुख्य कैबिनेट सचिव केई सातो ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में चीन के इस फैसले को "बिल्कुल असहनीय और बहुत खेदजनक" करार दिया। उन्होंने साफ कहा कि जापान इस कदम के संभावित प्रभावों का गहराई से आकलन कर रहा है और इसके जवाब में आवश्यक कदम उठाने पर विचार करेगा।

क्या हैं ये 'दोहरे उपयोग' वाली वस्तुएं ? (Taiwan conflict)

जापानी विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने चीन में अपने दूतावास के माध्यम से इस मामले में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। यह पूरा विवाद उन 'दोहरे उपयोग' वाली वस्तुओं को लेकर है, जिनका नागरिक और सैन्य, दोनों तरह के उपकरणों में इस्तेमाल किया जा सकता है। इनमें मुख्य रूप से 'रेयर अर्थ एलिमेंट्स' (Rare Earth Elements) शामिल हैं, जो इलेक्ट्रिक गाड़ियों, विमानों और आधुनिक हथियारों के निर्माण के लिए बहुत जरूरी हैं। गौरतलब है कि चीन इन दुर्लभ खनिजों का दुनिया का सबसे बड़ा सप्लायर है। इससे पहले 6 जनवरी को भी चीन ने जापान के लिए ऐसे ही निर्यात नियम सख्त कर दिए थे।

क्यों बढ़ा दोनों देशों में तनाव ? (China Japan tention)

जानकारों का मानना है कि इन व्यापारिक प्रतिबंधों की जड़ें हालिया राजनीतिक बयानों में छिपी हैं। पिछले साल नवंबर में जापानी प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने एक अहम बयान में कहा था कि अगर ताइवान पर कोई हमला होता है, तो जापान के आत्मरक्षा बल जवाबी कार्रवाई कर सकते हैं। माना जा रहा है कि चीन का यह निर्यात प्रतिबंध जापान के उसी कड़े रुख का सीधा जवाब है।

जापानी कंपनियों में हड़कंप (Japan defense companies)

चीनी वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, जिन कंपनियों को ब्लैकलिस्टेड किया गया है, उनमें मित्सुबिशी हेवी इंडस्ट्रीज (Mitsubishi Heavy Industries) और कावासाकी हेवी इंडस्ट्रीज (Kawasaki Heavy Industries) जैसी दिग्गज कंपनियों की सहायक इकाइयां शामिल हैं। इसके अलावा, जापान के रक्षा मंत्रालय के लिए विमान इंजन बनाने वाली IHI कॉर्पोरेशन भी इस सूची में हैं। इन कंपनियों का कहना है कि वे अभी भी स्थिति और प्रतिबंध के कारणों का पता लगाने की कोशिश कर रही है। जापान बिजनेस फेडरेशन ने भी इस फैसले को अनुचित बताते हुए सरकार से मामला सुलझाने की अपील की है।

जापानी उद्योगों के लिए बड़ी अनिश्चितता पैदा हो गई

इस पूरे विवाद पर आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि चीन की ओर से अचानक लगाए गए इन निर्यात नियंत्रणों से जापानी उद्योगों के लिए बड़ी अनिश्चितता पैदा हो गई है। एनएलआई रिसर्च इंस्टीट्यूट के यासुहिदे याजिमा ने कहा कि यह अस्पष्टता जापानी कंपनियों के भविष्य की योजनाओं को खतरे में डाल रही है। चूंकि यह सब चीन की राष्ट्रीय रणनीति का हिस्सा है, इसलिए इसका कोई आसान समाधान नजर नहीं आता।

सरकार उद्योग जगत के हितधारकों के साथ लगातार बैठकें कर रही है

जापान सरकार इस पूरी स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है। टोक्यो का मुख्य फोकस अब अपनी उच्च-तकनीकी (High-tech) विनिर्माण और रक्षा आपूर्ति श्रृंखलाओं (Defense Supply Chains) को सुरक्षित करना है। इसके लिए सरकार उद्योग जगत के हितधारकों के साथ लगातार बैठकें कर रही है, ताकि चीन के इस कदम से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके और वैकल्पिक रास्ते तलाशे जा सकें।

पूरी दुनिया की टेक और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री पर असर पड़ सकता है

बहरहाल, यह व्यापार युद्ध सिर्फ चीन और जापान तक सीमित नहीं रहने वाला है। 'रेयर अर्थ एलिमेंट्स' की आपूर्ति बाधित होने से पूरी दुनिया की टेक और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री पर असर पड़ सकता है। यह घटनाक्रम भारत और अमेरिका जैसे देशों के लिए भी एक अलर्ट है कि उन्हें महत्वपूर्ण खनिजों के लिए चीन पर अपनी निर्भरता कम करनी होगी और सप्लाई चेन को डायवर्सिफाई (Diversify) करना होगा। ( इनपुट: ANI)