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ट्रंप के डर से चीन की शरण में पहुंचा ईरान, फटाफट खरीद ली खतरनाक मिसाइल, जानें कहां करेगा तैनात ?

Anti-Ship Missiles: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और अमेरिकी चेतावनियों के बीच ईरान ने अपनी समुद्री ताकत बढ़ाने का बड़ा फैसला किया है। ईरान जल्द ही चीन से घातक Anti-Ship Missiles खरीदने जा रहा है, जिससे समंदर में पश्चिमी देशों की चिंता बढ़ गई है।

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भारत

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MI Zahir

Feb 24, 2026

China Anti-Ship Missiles

चीन की जहाज-रोधी मिसाइलें। ( फोटो: द वॉशिंगटन पोस्ट)

Middle East: मध्य पूर्व (Middle East tension)में एक बार फिर से युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं। अमेरिका और ईरान में जंग (US Iran conflict) के आसार नजर आ रहे हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की दी गई हालिया सैन्य हमले की धमकियों के बीच ईरान ने अपनी रक्षा पंक्ति को अभेद्य बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान जल्द ही चीन से घातक 'सुपरसोनिक एंटी-शिप क्रूज मिसाइलें' (Supersonic Anti-Ship Missiles) खरीदने जा रहा है। दोनों देशों के बीच यह रक्षा डील अपने अंतिम चरण (Iran China deal) में है। यह समझौता दुनिया भर की कूटनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत दे रहा है। इन सुपरसोनिक मिसाइलों (Anti-Ship Missiles) की खासियत यह है कि ये ध्वनि की गति से भी तेज उड़ान भरती हैं और दुश्मन के रडार को चकमा देने में माहिर होती हैं। यह समुद्र में मौजूद किसी भी बड़े जंगी जहाज या विमानवाहक पोत (Aircraft Carrier) को पलक झपकते ही तबाह कर सकती हैं।

ऐसे तो ईरान की सैन्य ताकत में भारी इजाफा होगा (Iran China deal)

अगर यह डील पूरी होती है, तो होर्मुज (Strait of Hormuz) और फारस की खाड़ी में ईरान की सैन्य ताकत में भारी इजाफा होगा। यह वही समुद्री रास्ता है जहां से दुनिया का एक बड़ा तेल व्यापार होता है और जहां अमेरिकी नौसेना का भारी पहरा रहता है। जानकार मान रहे हैं कि ईरान इन मिसाइलों के जरिए अमेरिका को सीधा और कड़ा संदेश देना चाहता है।

वाशिंगटन व इजराइल में खलबली मची (Supersonic Missiles)

इस डील की खबर सामने आते ही वाशिंगटन में हलचल तेज हो गई है। अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) इसे मध्य पूर्व की शांति और अमेरिकी नौसेना के लिए एक सीधा खतरा मान रहा है। ईरान के कट्टर दुश्मन इजराइल ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। इजराइल का मानना है कि ईरान के शस्त्रीकरण को रोकना अब पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है। ग्लोबल डिफेंस एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह सौदा इस क्षेत्र में 'गेम चेंजर' साबित होगा। चीन के हथियार मिलने के बाद ईरान पर सीधा सैन्य हमला करना अमेरिका के लिए भी आसान नहीं रहेगा।

चीन की कंपनियों पर नए प्रतिबंधों की आशंका (Ban on Chinese companies)


इस बात की पूरी संभावना है कि इस डील को रोकने या इसका बदला लेने के लिए अमेरिका, चीन की उन कंपनियों पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध (Sanctions) लगा सकता है जो इस सौदे में शामिल हैं। खुफिया एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुट गई हैं कि इन मिसाइलों की पहली खेप ईरान कब तक पहुंचेगी और उन्हें किन समुद्री ठिकानों पर तैनात किया जाएगा।

चीन की 'सुपरपावर' रणनीति: एक नजर

चीन इस डील के जरिए सिर्फ हथियार नहीं बेच रहा है, बल्कि वह मध्य पूर्व में अमेरिका के दबदबे को खुली चुनौती दे रहा है। खाड़ी देशों में चीन खुद को अमेरिका के एक मजबूत और भरोसेमंद विकल्प के तौर पर पेश कर रहा है।

ईरान का आंतरिक संकट

इस खबर का एक दूसरा पहलू ईरान की घरेलू स्थिति भी है। ईरान इस वक्त गंभीर आर्थिक संकट, महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रहा है। ऐसे में आम जनता के बीच इस बात को लेकर नाराजगी पनप सकती है कि सरकार अर्थव्यवस्था सुधारने के बजाय महंगे विदेशी हथियारों पर अरबों डॉलर खर्च कर रही है।