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पाकिस्तान में ‘मुन्ना भाई’ जज! 5 साल तक फर्जी डिग्री से सुनाते रहे फैसले, कहानी सुन पकड़ लेंगे अपना सिर

भारत

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Shaitan Prajapat

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Updated: 25 Feb 2026, 5:49 PM IST

Pakistan Judge Fake Degree Case

Pakistan Judge Fake Degree Case

Pakistan Judge Fake Degree Case 2026: पाकिस्तान की न्याय व्यवस्था में एक ऐसा मामला सामने आया है, जो फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं। इस्लामाबाद हाई कोर्ट के जज तारिक महमूद जहांगीरी ने करीब 5 साल तक बेंच पर बैठकर फैसले सुनाए, लेकिन उनकी LLB डिग्री फर्जी निकली। अदालत ने 116 पेज के विस्तृत फैसले में उनकी नियुक्ति को 'कानूनी रूप से अमान्य' घोषित कर दिया। यह धोखाधड़ी 1988 से शुरू हुई थी, जो अब जज की कुर्सी तक पहुंच गई।

इस्लामाबाद हाईकोर्ट में हुई थी नियुक्ति

तारिक महमूद जहांगीरी को दिसंबर 2020 में इस्लामाबाद हाई कोर्ट (IHC) का जज नियुक्त किया गया था। वे जुलाई 2024 तक सक्रिय रहे, लेकिन पिछले साल सितंबर से न्यायिक कार्यों से रोक दिए गए थे। मामला तब उछला जब उनकी LLB डिग्री पर सवाल उठे। कराची यूनिवर्सिटी के मूल रिकॉर्ड से खुलासा हुआ कि जहांगीरी ने 1988 में LLB पार्ट-1 की परीक्षा फर्जी एनरोलमेंट नंबर से दी। उन्हें नकल करते पकड़ा गया, 1989 में तीन साल के लिए बैन कर दिया गया।

एक एनरोलमेंट नंबर और दो छात्र के नाम

बाद में उन्होंने 1989 में परीक्षा दी, लेकिन दूसरे छात्र के नाम और एनरोलमेंट नंबर से। गवर्नमेंट इस्लामिया लॉ कॉलेज के प्रिंसिपल ने पुष्टि की कि जहांगीरी कभी वहां एडमिट ही नहीं हुए। उन्होंने नाम बदलकर, एनरोलमेंट नंबर फर्जी करके मार्कशीट और डिग्री हासिल की। यूनिवर्सिटी ने इसे 'अमान्य' (invalid) घोषित किया, न कि सिर्फ फर्जी, क्योंकि धोखाधड़ी से हासिल की गई थी।

चीफ जस्टिस की बेंच ने सुनाया 116 पेज का फैसला

फरवरी 23, 2026 को चीफ जस्टिस सरदार मुहम्मद सरफराज डोगर और जस्टिस मुहम्मद आजम खान की बेंच ने 116 पेज का फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि जहांगीरी की डिग्री 'void ab initio' यानी शुरू से ही अमान्य है। इसलिए उनकी हाई कोर्ट जज की नियुक्ति 'बिना कानूनी अधिकार' की थी और 'कानूनी शून्य' (legal nullity)। अदालत ने उनके कई आवेदनों को 'दिलेटरी टैक्टिक्स' और 'बेंच-हंटिंग' बताया, जिसमें CJ की रिक्यूजल और फुल बेंच की मांग शामिल थी। प्रूफ का बोझ जहांगीरी पर था, लेकिन वे मूल दस्तावेज नहीं दिखा सके। अदालत ने कहा कि फर्जी योग्यता बाद में सही नहीं हो सकती। इस फैसले से उनकी पूरी जज की सेवा अमान्य हो गई।

पाकिस्तान की न्यायिक प्रणाली पर सवाल

यह मामला पाकिस्तान की न्यायिक प्रणाली पर सवाल उठाता है। जहांगीरी जैसे व्यक्ति कैसे इतने साल बेंच पर बैठे रहे? जुलाई 2024 में सुप्रीम जुडिशियल काउंसिल में शिकायत हुई थी, लेकिन IHC ने खुद जांच कर फैसला सुना दिया। कुछ सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया गया कि डिग्री वैध थी और फैसले मेरिट पर थे, लेकिन अदालत के फैसले ने सब कुछ खारिज कर दिया।

'मुन्ना भाई MBBS' स्टाइल की धोखाधड़ी

यह घटना 'मुन्ना भाई MBBS' स्टाइल की धोखाधड़ी की याद दिलाती है, जहां फर्जी डिग्री से जिंदगी चलाई जाती है। पाकिस्तान में फर्जी डिग्री के कई मामले सामने आए हैं, लेकिन हाई कोर्ट जज का यह केस सबसे बड़ा झटका है। न्याय की कुर्सी पर बैठे व्यक्ति की योग्यता पर सवाल—यह कहानी सुनकर सच में सिर पकड़ लेने वाला है।

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