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US Iran Tensions: होर्मुज पर अमेरिका का रुख सख्त, हेगसेथ बोले- ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने देंगे

Iran US Conflict: होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिकी दबाव बरकरार है और वॉशिंगटन ने ईरान को स्पष्ट संदेश दिया है। परमाणु हथियार के मुद्दे पर ट्रंप प्रशासन की नीति में नरमी के संकेत नहीं हैं, जबकि समुद्री आवाजाही को लेकर तनाव आगे बढ़ने की आशंका बनी हुई है।
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Oct 04, 2026
Pete Hegseth, Donald Trump Iran
Iran Nuclear Weapon: हेगसेथ बोले- ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने देंगे (फोटो सोर्स:@SecWar)

Iran Nuclear Program: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अब समुद्री रास्ते और परमाणु कार्यक्रम, दोनों मोर्चों पर गहराता दिख रहा है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने साफ किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर वॉशिंगटन का रुख नहीं बदला है। उनके बयान से संकेत मिला कि अगर तेहरान इस अहम समुद्री मार्ग को लेकर अमेरिकी शर्तों के खिलाफ जाता है, तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास आगे की कार्रवाई के कई विकल्प खुले हैं। इससे ऊर्जा बाजारों और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी नजरें टिक गई हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिका का कड़ा रुख

अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी समुद्री नाकाबंदी को लेकर कड़ा रुख दोहराया है। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिकी स्थिति पूरी तरह अडिग है। हेगसेथ के मुताबिक, इस समय अमेरिका का नियंत्रण प्रभावी है और ईरान इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते से सामान की आवाजाही कराने में सफल नहीं हुआ है।

हेगसेथ ने ईरान से टकराव बढ़ाने के बजाय “सही फैसला” लेने का आह्वान किया। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर तेहरान अमेरिकी दबाव को नजरअंदाज करता है, तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास आगे की कार्रवाई के सभी जरूरी विकल्प मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि ट्रंप इस मिशन के उद्देश्य को समझते हैं और जरूरत पड़ने पर इसे पूरा करने की क्षमता रखते हैं।

ईरान का परमाणु कार्यक्रम और वॉशिंगटन की प्राथमिकताएं

इस बयान का दूसरा अहम पहलू ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ा है। हेगसेथ ने कहा कि अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा प्राथमिकताओं में यह बेहद महत्वपूर्ण है कि ईरान परमाणु हथियार हासिल न करे। उन्होंने दोहराया कि ट्रंप प्रशासन ईरान को परमाणु हथियार रखने से रोकने के लिए प्रतिबद्ध है।

क्यों अहम है होरमुज?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में शामिल है। अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) के मुताबिक, 2024 में दुनिया के समुद्री रास्ते से होने वाले तेल व्यापार का एक-चौथाई से अधिक हिस्सा इस मार्ग से गुजरा था। वैश्विक LNG व्यापार का करीब पांचवां हिस्सा भी इसी जलमार्ग से होकर गुजरता है।

यही वजह है कि यहां लंबे समय तक व्यवधान का असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहता। तेल की आपूर्ति, शिपिंग लागत और अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतों पर इसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है। EIA ने सितंबर 2026 के अपने आकलन में बताया कि मध्य पूर्व से सीमित निर्यात के बीच अगस्त में ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत 91 डॉलर प्रति बैरल रही।

कूटनीतिक प्रयास और आगे की राह

इस बीच, ईरान और अमेरिका के बीच किसी संभावित समझौते को लेकर कूटनीतिक गतिविधियां भी जारी हैं। AP के अनुसार, मध्यस्थ दोनों पक्षों के बीच बातचीत आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, जिसमें होरमुज को फिर से खोलना और परमाणु मुद्दे पर समझौते की संभावनाएं शामिल हैं।

फिलहाल हेगसेथ के बयान ने साफ कर दिया है कि वॉशिंगटन समुद्री दबाव और ईरान के परमाणु कार्यक्रम दोनों मुद्दों को अपनी रणनीति के केंद्र में रख रहा है। आने वाले दिनों में तेहरान की प्रतिक्रिया इस तनाव की अगली दिशा तय करने में अहम हो सकती है।

Updated on:
04 Oct 2026 07:30 am
Published on:
04 Oct 2026 06:33 am