
Iran naval Blockade: मिडिल-ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। अब ओमान की खाड़ी में अमेरिकी सेना ने एक कमर्शियल कार्गो जहाज के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, यह जहाज ईरानी बंदरगाह से निकलने के बाद समुद्री नाकाबंदी से बचकर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा था। अमेरिकी सेना ने पहले उसे कई बार चेतावनी दी। जब जहाज के चालक दल ने इन चेतावनियों को नजरअंदाज किया। इसके बाद अमेरिकी लड़ाकू विमान ने उसके पिछले हिस्से पर हमला कर दिया। इससे जहाज का प्रोपल्शन सिस्टम काम करना बंद कर गया।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, यह कार्रवाई शनिवार को ओमान की खाड़ी में की गई। निशाने पर पनामा के झंडे वाला कमर्शियल जहाज ‘M/V Ocean Molika’ था। इसे ‘Arica Sun’ के नाम से भी जाना जाता है। अमेरिकी सेना ने जहाज के पिछले हिस्से पर सटीक हमला किया। इसका उद्देश्य जहाज की आगे बढ़ने की क्षमता को रोकना था।
‘CENTCOM’ का कहना है कि जहाज ईरानी बंदरगाह से निकलने के बाद अमेरिकी नाकाबंदी से बचने की कोशिश कर रहा था। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, चालक दल को बार-बार चेतावनी दी गई थी। इसके बावजूद जहाज आगे बढ़ता रहा।
‘CENTCOM’ (अमेरिकी सेंट्रल कमांड) के अनुसार, अमेरिकी सेना ने 14 जुलाई को ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों के खिलाफ नाकाबंदी फिर से शुरू की थी। अमेरिकी पक्ष का दावा है कि इस दौरान कई जहाजों को रोका गया और 135 जहाजों को वापस लौटने के लिए कहा गया। ‘CENTCOM’ ने ईरान के ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) से जुड़े कथित शैडो नेटवर्क के 10 टैंकरों को नष्ट करने की भी बात कही है।
दूसरी ओर, ईरान ने भी होर्मुज में अपनी कार्रवाई तेज करने का दावा किया है। ईरानी मीडिया के मुताबिक, IRGC ने ‘NV Sunshine’ नाम के एक LPG जहाज पर कार्रवाई की। ईरान का आरोप है कि जहाज प्रतिबंधित रास्ते से गुजरने की कोशिश कर रहा था। हालांकि, इन दावों की भी स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
बता दें होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है। युद्ध से पहले वैश्विक स्तर पर खपत होने वाले तेल का लगभग पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता था। बड़ी मात्रा में LNG की ढुलाई भी इसी मार्ग से होती है।
इस क्षेत्र में जहाजों पर हमले बढ़ने से तेल की सप्लाई प्रभावित होने का खतरा है। इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार और ईंधन (तेल-गैस) की कीमतों पर भी पड़ सकता है। अमेरिकी सीनेटर क्रिस मर्फी ने भी इस सैन्य कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि कमर्शियल जहाजों पर हमले के लिए अमेरिकी करदाताओं का पैसा क्यों खर्च किया जा रहा है। फिलहाल, खाड़ी क्षेत्र में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच समुद्री रास्तों को लेकर टकराव बढ़ने से वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है।