
फोटो में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (सोर्स- ANI)
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रूस को लेकर लिए गए फैसले पर अब उनकी अपनी ही रिपब्लिकन पार्टी के कुछ सांसद सवाल उठा रहे हैं। रूस पर लगे प्रतिबंधों में ढील देने की ट्रंप की कोशिश को रोकने के लिए रिपब्लिकन सांसद ब्रायन फिट्जपैट्रिक ने एक नया बिल लाने का ऐलान किया है।
इस पहल को उनकी पार्टी के एक अन्य सांसद डॉन बेकन का भी समर्थन मिला है। दोनों सांसदों की कोशिश है कि रूस से जुड़े प्रतिबंधों को हटाने के राष्ट्रपति के फैसले पर रोक लगाई जा सके।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच बातचीत के बाद रूस पर लगे प्रतिबंधों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
हालांकि, अमेरिकी संसद में इस बिल को पारित कराने की राह आसान नहीं दिख रही है। प्रतिनिधि सभा का मौजूदा कार्यकाल जनवरी में खत्म होने वाला है। ऐसे में इस बिल पर कार्रवाई के लिए सांसदों के पास सीमित समय बचा है।
रिपब्लिकन सांसद ब्रायन फिट्जपैट्रिक ने कहा है कि वह एक ऐसा बिल पेश करेंगे, जिसका मकसद रूस पर लगे प्रतिबंधों को हटाने की ट्रंप की कोशिश को रोकना है। इस प्रस्ताव को दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों का समर्थन दिलाने की भी कोशिश की जा रही है।
फिट्जपैट्रिक की यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि वह उसी रिपब्लिकन पार्टी से आते हैं, जिससे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जुड़े हैं। आमतौर पर पार्टी के सांसद राष्ट्रपति के प्रमुख फैसलों का समर्थन करते नजर आते हैं, लेकिन रूस के मामले में कुछ सांसदों का रुख अलग दिखाई दे रहा है।
प्रस्तावित बिल का मुख्य उद्देश्य रूस से जुड़े प्रतिबंधों को हटाने के फैसले पर रोक लगाना है। हालांकि, इसे लेकर अभी यह स्पष्ट नहीं है कि प्रतिनिधि सभा में इसे कितने सांसदों का समर्थन मिलेगा और इस पर मतदान कब हो सकता है।
फिट्जपैट्रिक की इस कोशिश को रिपब्लिकन सांसद डॉन बेकन का समर्थन मिला है। नेब्रास्का से आने वाले बेकन ने इस बिल का सह-प्रायोजक बनने का फैसला किया है। वह जल्द ही संसद से विदा होने वाले हैं।
बेकन का समर्थन इस मामले को और अहम बनाता है। इससे संकेत मिलता है कि रूस के साथ संबंधों और प्रतिबंधों को लेकर रिपब्लिकन पार्टी के भीतर भी एक राय नहीं है। दोनों सांसदों की कोशिश ऐसे समय हो रही है, जब रूस को लेकर अमेरिकी प्रशासन की नीति पर राजनीतिक बहस जारी है।
इस बिल के सामने सबसे बड़ी चुनौती समय की कमी है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा का मौजूदा कार्यकाल जनवरी में समाप्त हो रहा है। ऐसे में सांसदों के पास बिल पर चर्चा करने, उसे आगे बढ़ाने और पारित कराने के लिए कुछ ही महीने बचे हैं।
अगर इस अवधि में बिल पर ठोस कार्रवाई नहीं होती है, तो इसे आगे बढ़ाना मुश्किल हो सकता है। इसी वजह से फिट्जपैट्रिक और बेकन की पहल को फिलहाल काफी हद तक प्रतीकात्मक माना जा रहा है।
हालांकि, बिल का संसद में पेश होना भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है। इससे ट्रंप की रूस नीति को लेकर रिपब्लिकन पार्टी के भीतर मौजूद मतभेद सामने आ सकते हैं।
Updated on:
11 Oct 2026 08:18 am
Published on:
11 Oct 2026 08:18 am
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