ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने दुनिया का सबसे बड़ा विमानवाहक पोत मध्य-पूर्व भेजा है। जानिए इस कदम के रणनीतिक मायने, ट्रंप की चेतावनी और क्षेत्रीय सुरक्षा पर संभावित असर।
US-Iran Tensions: अमेरिका और ईरान के बीच फिर तनाव बढ़ सकता है। दरअसल, दुनिया का सबसे बड़ा विमानवाहक पोत यूएसएस जेराल्ड आर फोर्ड को कैरेबियन सागर से हटाकर संयुक्त राज्य अमेरिका मध्य-पूर्व भेजा है। वहां पहले से मौजूद एक अन्य पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन और उसके साथ गाइडेड-मिसाइल विध्वंसक तैनात है। इसकी जानकारी शुक्रवार को दी गई।
वहीं, अमेरिका के इस फैसले से राष्ट्रपति Donald Trump के उस प्रयास को और सैन्य ताकत मिलेगी, जिसके तहत वे ईरान को उसके परमाणु कार्यक्रम पर समझौते के लिए दबाव में लाना चाहते हैं। खास बात यह है कि यूएसएस जेराल्ड आर फोर्ड की मध्य-पूर्व में तैनाती ऐसे समय में होने जा रही है, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कुछ ही दिन पहले ईरान के साथ एक और दौर की बातचीत की संभावना जताई थी।
हालांकि, वे वार्ताएं साकार नहीं हो सकीं, क्योंकि तेहरान के एक शीर्ष सुरक्षा अधिकारी ने इस सप्ताह ओमान और कतर का दौरा किया और अमेरिकी मध्यस्थों के साथ संदेशों का आदान-प्रदान किया।
पहले से ही अरब देशों ने चेतावनी दी है कि किसी भी हमले से इस क्षेत्र में एक और बड़ा संघर्ष भड़क सकता है, जबकि मध्य पूर्व अभी भी गाजा पट्टी में इज़राइल-हमास युद्ध के प्रभावों से जूझ रहा है। इसी बीच, ईरान में पिछले महीने देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों पर हुए दमन में मारे गए हजारों लोगों की 40वें दिन की शोक सभाएं हो रही हैं। इससे प्रतिबंधों से जूझ रहे इस्लामिक गणराज्य पर आंतरिक दबाव और बढ़ रहा है।
डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले दिनों ईरान को चेतावनी दी कि यदि उसकी प्रशासन के साथ समझौता नहीं हुआ तो परिणाम “बेहद दर्दनाक” होंगे। पिछले सप्ताह ओमान में ईरान और अमेरिका के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता हुई थी। ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर समझौते की समयसीमा से जुड़े सवाल के जवाब में कहा, “मेरा अनुमान है कि अगले महीने के भीतर कुछ होगा,” “यह जल्दी होना चाहिए। उन्हें बहुत जल्दी सहमत होना चाहिए।