
तारिक रहमान और उनके साथी सांसद। ( सांकेतिक फोटो: AI)
Bangladesh MPs Criminal Records: बांग्लादेश में एक बड़े सियासी भूचाल, चुनाव (Bangladesh Election 2026) और शेख हसीना के देश छोड़ कर भारत (Sheikh Hasina India) जाने के बाद, अब नई सरकार के गठन की तैयारियां चल रही हैं। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के कार्यकारी अध्यक्ष तारिक रहमान ()Tarique Rahman PM) की अगुवाई में नई सरकार शपथ लेने वाली है। जनता ने अवामी लीग के शासन को उखाड़ फेंका, लेकिन क्या वाकई 'निजाम' बदला है? एक ताज़ा रिपोर्ट (BNP Victory Analysis) ने जो खुलासा किया है, जिसने जश्न के माहौल में सन्नाटा घोल दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, तारिक रहमान के नेतृत्व में जो नए सांसद चुनकर आए हैं, उनमें से कई कानून के रखवाले कम और 'हिस्ट्रीशीटर' ज्यादा नजर आते हैं। नागरिक अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था 'सुजन' (SHUJAN - सुशासन के लिए नागरिक) ने नवनिर्वाचित सांसदों के हलफनामों का विश्लेषण किया है। विश्लेषण से पता चलता है कि चेहरे भले ही बदल गए हों-हसीना की जगह तारिक रहमान आ गए हों-लेकिन संसद की फितरत वही है। रिपोर्ट दावा करती है कि नवनिर्वाचित सदन में ऐसे माननीय बैठे हैं, जिनके दामन पर खून के छींटे हैं।
सुजन के सचिव बदीउल आलम मजूमदार की ओर से जारी आंकड़ों ने सबको चौंका दिया है। चुनावी मैदान में जीत हासिल करने वाले सांसदों के हलफनामों को अगर जोड़ा जाए, तो हत्या से जुड़े करीब 1200 मामले सामने आते हैं। सबसे शर्मनाक पहलू यह है कि महिला सुरक्षा के वादे करने वाली नई संसद में ऐसे लोग भी पहुंचे हैं, जिन पर बलात्कार (Rape) के कम से कम 13 गंभीर मामले दर्ज हैं। सवाल यह उठता है कि क्या शेख हसीना को हटाने का मकसद सिर्फ सत्ता परिवर्तन था, या व्यवस्था परिवर्तन? क्योंकि संसद में अपराधी प्रवृत्ति के लोगों का ग्राफ नीचे नहीं आया है।
अपराध के अलावा, धनबल का बोलबाला भी इस चुनाव में साफ दिखा है। रिपोर्ट बताती है कि नई संसद में पहुंचने वाले 67% से ज्यादा सांसद करोड़पति हैं। राजनीति अब सेवा नहीं, बल्कि भारी निवेश वाला धंधा बन गई है। 1970 के दशक में जहाँ संसद में शिक्षक और वकील दिखते थे, वहीं अब 90% कुर्सियों पर बड़े व्यवसायी और ठेकेदार काबिज हैं।
लंदन से लंबी वतन वापसी और अब सरकार बनाने जा रहे तारिक रहमान के लिए यह रिपोर्ट किसी चुनौती से कम नहीं है। अवामी लीग के बहिष्कार और शेख हसीना की अनुपस्थिति में हुए इस चुनाव में बीएनपी और उनके सहयोगियों ने बड़ी जीत तो दर्ज की, लेकिन अपनी ही पार्टी के भीतर मौजूद इन दागी चेहरों को वे कैसे संभालेंगे, यह देखना होगा। जनता ने उन्हें 'नई उम्मीद' मानकर वोट दिया था, लेकिन नतीजों में 'पुराने डर' की झलक दिख रही है।
नागरिक समाज: ढाका के बुद्धिजीवियों का कहना है कि "हमने एक तानाशाह को हटाया, लेकिन अगर उसकी जगह अपराधी ही संसद चलाएंगे, तो लोकतंत्र का क्या मतलब ?"
सोशल मीडिया: बांग्लादेशी यूज़र्स तारिक रहमान से सवाल कर रहे हैं। ट्विटर (X) पर लोग लिख रहे हैं कि "हत्या और रेप के आरोपियों को टिकट देना क्या 'नया बांग्लादेश' है?"
अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक: मानवाधिकार संस्थाओं ने चिंता जताई है कि नई सरकार में अगर ऐसे तत्वों को मंत्री पद मिला, तो मानवाधिकारों की स्थिति और बिगड़ सकती है।
कैबिनेट गठन: सबकी निगाहें अब तारिक रहमान की कैबिनेट पर होंगी। क्या वे इन दागी सांसदों को मंत्री बनाएंगे या अपनी छवि सुधारने के लिए इन्हें दूर रखेंगे?
कानूनी पेच: क्या नई सरकार बनते ही इन सांसदों पर चल रहे पुराने मुकदमों को वापस ले लिया जाएगा, जैसा कि अक्सर सत्ता परिवर्तन के बाद होता है? यह देखना दिलचस्प होगा।
बहरहाल,भारत के लिए यह स्थिति बेहद संवेदनशील है। शेख हसीना भारत में शरण लिए हुए हैं और ढाका में एक ऐसी सरकार बन रही है जिसके कई सांसदों पर गंभीर आपराधिक आरोप हैं। भारत को अपनी सीमा सुरक्षा और कूटनीतिक संबंधों को संतुलित करने के लिए इस 'दागी संसद' के साथ काम करना होगा। एक अस्थिर या अपराधी तत्वों से भरी संसद भारत के नॉर्थ-ईस्ट के लिए सुरक्षा जोखिम पैदा कर सकती है।
(इनपुट: सुजन रिपोर्ट विश्लेषण)
Updated on:
14 Feb 2026 03:30 pm
Published on:
14 Feb 2026 03:29 pm
