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ईरान ने अमेरिका के 160 एयरबेस और 2 दूतावासों पर कैसे किए धमाके ? पढ़ें हमलों की इनसाइड स्टोरी

Targeted Locations: अमेरिका और ईरान के बीच भयंकर तनाव जारी है। जानिए कैसे ईरान ने 160 से ज्यादा अमेरिकी सैन्य ठिकानों और दूतावासों को अपना निशाना बनाया है।

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Mar 18, 2026
ईरान की ओर से अमेरिकी एयरबेस पर किए गए हमलों के बाद क्षतिग्रस्त स्थल की सेटेलाइट इमेज। (फोटो: द वॉशिंगटन पोस्ट)

US-Iran Conflict: ईरान और अमेरिका के बीच भयंकर दुश्मनी (US Iran Conflict) अब एक नए और खतरनाक मुकाम पर पहुंच चुकी है। मिडिल ईस्ट में वर्चस्व की इस जंग में ईरान और उसके समर्थित गुटों ने अब तक 160 से अधिक छोटे-बड़े अमेरिकी सैन्य ठिकानों और प्रमुख दूतावासों (US Embassies) पर प्रहार किया है। इस भू-राजनीतिक टकराव का सबसे खौफनाक मंजर जनवरी 2020 में सामने आया था, जब इराक स्थित बड़े एयरबेस (Al Asad Airbase) पर सीधे बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गई थीं। यह भीषण हमला कुद्स फोर्स के कमांडर कासिम सुलेमानी की मौत (Soleimani Assassination) का बदला था, जिसमें 109 अमेरिकी सैनिकों को गंभीर दिमागी चोटें आई थीं। आज भी यह जंग ड्रोन और रॉकेट हमलों के जरिये लगातार जारी है।

बगदाद और दुबई का टारगेट: एयरबेस या दूतावास ? (Embassy vs Airbase)

लोगों में अक्सर यह भ्रम रहता है कि ईरान बगदाद और दुबई में किन जगहों को निशाना बनाता है। इराक की राजधानी बगदाद की बात करें, तो वहां सबसे बड़ा टारगेट भारी सुरक्षा वाला अमेरिकी दूतावास है। ईरान समर्थित शिया गुटों ने दिसंबर 2019 में दूतावास की दीवारें तोड़कर भयंकर आगजनी की थी और वे आज भी बगदाद के 'ग्रीन ज़ोन' में रॉकेट दागते रहते हैं। वहीं, जब बात संयुक्त अरब अमीरात (UAE) या दुबई की होती है, तो वहां हमलों का मुख्य निशाना दूतावास नहीं, बल्कि अबू धाबी स्थित 'अल धफरा एयरबेस' रहा है, जहां अमेरिकी मिसाइल डिफेंस सिस्टम तैनात हैं।

हमलों का शिकार बने प्रमुख एयरबेस की लिस्ट (Targeted Airbases)

पिछले कुछ सालों में ईरान और उसके छद्म गुटों ने इराक और सीरिया में मौजूद कई अमेरिकी सैन्य अड्डों पर कहर बरपाया है और 160 से ज्यादा वार किए हैं। इनमें इराक का 'अल असद एयरबेस', 'इरबिल एयरबेस' और 'अल हरीर बेस' मुख्य रूप से शामिल हैं, जहां दर्जनों बार ड्रोन से हमले हुए। जनवरी 2024 में जॉर्डन-सीरिया बॉर्डर पर स्थित 'टावर 22' बेस पर हुए एक आत्मघाती ड्रोन हमले में 3 अमेरिकी सैनिकों की जान चली गई थी। इसके अलावा सीरिया के 'अल उमर ऑयल फील्ड बेस' पर भी लगातार रॉकेट दागे जाते रहे हैं।

दूतावास बंधक संकट से लेकर आज के खौफनाक हालात (Current Escalation)

अमेरिका को सबसे बड़ा कूटनीतिक जख्म 1979 की इस्लामी क्रांति के दौरान मिला था, जब तेहरान स्थित दूतावास पर कब्जा कर 52 अमेरिकियों को 444 दिनों तक बंधक बनाया गया था। आज हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि 160 से ज्यादा हमलों के बाद अमेरिका और ईरान की सेनाएं आमने-सामने आने के कगार पर हैं। ईरान लगातार अपने मिसाइल भंडार को बढ़ा रहा है, जिससे पूरे मिडिल ईस्ट में एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध का डर सताने लगा है।

पेंटागन कर नजर में उकसावा है ये हमले

अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) ने इन 160 से ज्यादा हमलों को सीधा उकसावा बताया है। अमेरिका का स्पष्ट कहना है कि वह अपने एयरबेस और दूतावासों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा और हर हमले का करारा जवाब देगा। वहीं, ईरान का दावा है कि ये हमले मध्य पूर्व से अमेरिकी सेना को खदेड़ने की रणनीति का हिस्सा हैं।

सभी एयरबेस पर एयर डिफेंस सिस्टम एक्टिव

इन 160 से ज्यादा हमलों के बाद अमेरिका ने इराक, सीरिया और खाड़ी देशों में मौजूद अपने सभी एयरबेस पर एयर डिफेंस सिस्टम (जैसे C-RAM) को पूरी तरह एक्टिव कर दिया है। बगदाद में स्थित अमेरिकी दूतावास की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त सैनिक और हथियार तैनात किए गए हैं।

ईरान 'प्रॉक्सी गुटों' से यूएस एयरबेस पर करवाता है वार

बहरहाल, ईरान खुद सीधे युद्ध में उतरने से बचता है। वह यमन के हूती, लेबनान के हिजबुल्लाह और इराक के शिया मिलिशिया जैसे 'प्रॉक्सी गुटों' के जरिए अमेरिकी एयरबेस पर वार करवाता है। इस संघर्ष का सीधा असर ग्लोबल मार्केट पर पड़ता है, जिससे खाड़ी से होने वाले तेल व्यापार पर खतरा मंडराता है और कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने का डर बना रहता है।

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