
Hormuz Oil Crisis: हॉर्मुज पर अमेरिका और ईरान के दावों की जंग अब समुद्री जहाजों और तेल की सप्लाई तक पहुंच चुकी है। अमेरिकी नाकाबंदी के बीच दर्जनों व्यावसायिक जहाजों का रास्ता बदला गया है, वहीं ईरान पीछे हटने को तैयार नहीं है। दूसरी ओर, इजरायल की गाजा और लेबनान में सैन्य कार्रवाई ने क्षेत्रीय तनाव को और पेचीदा कर दिया है।
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच बयानबाजी अब महज राजनीतिक दावे तक सीमित नहीं रह गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार कह रहे हैं कि अमेरिका इस रणनीतिक जलमार्ग पर ‘टोटल कंट्रोल’ रखता है और आने वाले समय में इसे अपने प्रभाव में बनाए रखने की योजना है। इसके उलट ईरान का कहना है कि जब तक उसकी मांगें पूरी नहीं होतीं, हॉर्मुज को खोलने का सवाल ही नहीं उठता।
यानी एक ही समुद्री रास्ते को लेकर दोनों देशों की कहानी बिल्कुल अलग है। वॉशिंगटन इसे अपने सैन्य प्रभाव और नौवहन नियंत्रण के तौर पर पेश कर रहा है, जबकि तेहरान इसे अपनी रणनीतिक ताकत और दबाव बनाने के हथियार के रूप में देख रहा है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, ईरान के खिलाफ दोबारा लागू की गई नौसैनिक नाकाबंदी के तहत अमेरिकी बलों ने 59 वाणिज्यिक जहाजों का मार्ग बदला, तीन जहाजों को निष्क्रिय किया और दो को बोर्ड कर जांच की। यह घटनाक्रम बताता है कि हॉर्मुज का विवाद अब केवल बयानबाजी नहीं, बल्कि समुद्री आवाजाही को सीधे प्रभावित करने लगा है।
रिपोर्टों के मुताबिक एक ऐसे जहाज पर अमेरिकी हेलिकॉप्टर ने भी कार्रवाई की, जिसने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी को तोड़ने की कोशिश की थी। इस तरह की घटनाएं किसी बड़ी समुद्री भिड़ंत का खतरा बढ़ाती हैं, क्योंकि हॉर्मुज से गुजरने वाले जहाज अलग-अलग देशों के झंडे लेकर चलते हैं।
व्हाइट हाउस से जुड़े एक अधिकारी के हवाले से मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि अमेरिकी प्रतिबंधों और नौसैनिक नाकाबंदी ने ईरान की अर्थव्यवस्था पर बेहद गंभीर दबाव डाला है। अमेरिकी प्रशासन का संकेत है कि आने वाले महीनों में तेहरान पर दबाव बढ़ाने के लिए उसके पास कई विकल्प मौजूद हैं।
लेकिन आर्थिक दबाव के बावजूद ईरान ने अपने रुख में नरमी का संकेत नहीं दिया है। तेहरान का संदेश साफ है कि हॉर्मुज को लेकर वह अपनी शर्तों से पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है।
हॉर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। अमेरिकी एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन के अनुसार, 2025 की पहली छमाही में इस जलडमरूमध्य से औसतन करीब 20.9 मिलियन बैरल प्रतिदिन तेल का प्रवाह हुआ, जो वैश्विक पेट्रोलियम तरल ईंधन खपत के लगभग पांचवें हिस्से के बराबर है। इसके अलावा दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का करीब एक-चौथाई हिस्सा भी इस मार्ग से जुड़ा है।
यही वजह है कि हॉर्मुज में जहाजों की आवाजाही धीमी होने भर से दुनिया भर में तेल, गैस, शिपिंग और बीमा की लागत प्रभावित हो सकती है। EIA के मुताबिक, इस जलमार्ग में व्यवधान आने पर वैकल्पिक पाइपलाइन और दूसरे रास्ते पूरी मात्रा को संभालने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी यानी IEA ने अगस्त की अपनी रिपोर्ट में वैश्विक तेल बाजार को लेकर गंभीर तस्वीर पेश की है। एजेंसी ने 2026 में वैश्विक तेल सप्लाई में करीब 4.3 मिलियन बैरल प्रतिदिन की गिरावट का अनुमान लगाया है। हॉर्मुज और बाब-अल-मंदेब जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में व्यवधान इसका बड़ा कारण है।
IEA ने यह भी बताया है कि युद्ध और महंगे तेल के कारण मांग पर भी दबाव पड़ रहा है। यानी संकट का असर सिर्फ सप्लाई कम होने तक सीमित नहीं है महंगा ईंधन खपत और आर्थिक गतिविधियों को भी प्रभावित कर सकता है।
इस बीच पाकिस्तान भी अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का रास्ता खोलने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने वरिष्ठ ईरानी अधिकारियों के साथ बातचीत की है और दोनों पक्षों को बातचीत की मेज पर लाने की कोशिश की जा रही है।
हालांकि, मौजूदा हालात में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अमेरिका हॉर्मुज और ईरानी बंदरगाहों पर अपने नियंत्रण को लेकर पीछे हटता दिखाई नहीं दे रहा, जबकि ईरान भी अपनी शर्तों से समझौता करने के मूड में नहीं है।