US-Israel-Iran War: ईरान ने डिमोना में मिसाइल हमला किया, जिससे परमाणु प्लांट पर रेडिएशन का खतरा बढ़ गया। जानिए क्या इस संघर्ष से परमाणु संकट मंडरा रहा है और दुनिया के लिए क्या हो सकते हैं परिणाम।
Nuclear tension in US-Israel-Iran War: ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। दूसरी ओर ईरान भी पलटवार करने से पीछे नहीं हट रहा है। इस बार ईरान ने दक्षिणी इजरायली शहर डिमोना में कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिससे 100 से अधिक लोग घायल हो गए। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इजरायल का एयर डिफेंस ईरानी मिसाइलों को रोकने में नाकाम रहा। ईरानी मिसाइलों के क्लस्टर म्यूनिशन डिमोना के कई स्थानों पर गिरे हैं। उधर, ईरान ने कहा है कि यह हमला उसके परमाणु ठिकाने नतांज पर हुए हमले का जवाब है। इजरायल के अनुसार, यह मिसाइल उस इलाके में गिरी जहां देश का परमाणु संयंत्र स्थित है।
ईरान के इस हमले से परमाणु ठिकाने से रेडिएशन लीक होने का खतरा पैदा हो गया है। वैसे ईरान के निशाने पर पहले भी डिमोना रहा है, लेकिन इस बार यह सीधे हिट हुआ है। हालांकि इसको लेकर इजरायल ने आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन स्थानीय स्तर पर धुएं और आग की खबरें हैं। इस तरह देखा जाए तो जिस तरह ईरान, इजरायल और अमेरिका परमाणु ठिकानों को निशाना बना रहे हैं, डर है कि कहीं यह युद्ध परमाणु संघर्ष में न बदल जाए।
अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर पिछले महीने 28 फरवरी को हमला किया था। तब से अब तक दोनों देशों की सेनाएं संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हुए नतांज, फोर्डो, इस्फहान, पारचिन और मिन्जादेही को निशाना बना चुकी हैं। वहीं ईरान की ओर से डिमोना को निशाना बनाया गया है। परमाणु संयंत्रों पर हमलों से रेडिएशन लीक का खतरा बढ़ गया है। इजरायल के डिमोना और ईरान के प्लांट्स में यूरेनियम और प्लूटोनियम का भंडार है। यदि रेडिएशन फैला, तो आसपास के इलाकों में लोग बीमार हो सकते हैं। इतना ही नहीं, मिट्टी और पानी भी प्रदूषित हो सकते हैं।
उधर, डिमोना के पास स्थित नेगेव परमाणु अनुसंधान केंद्र पर ईरानी हमले के बाद रविवार को अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने कहा कि उसे यहां किसी भी नुकसान के संकेत नहीं मिले हैं। सोशल मीडिया ‘X’ पर पोस्ट में IAEA ने कहा, 'आईएईए को इजरायल के डिमोना शहर में मिसाइल हमले से जुड़ी घटना की जानकारी है और नेगेव परमाणु अनुसंधान केंद्र को किसी भी प्रकार की क्षति का कोई संकेत नहीं मिला है। क्षेत्रीय राज्यों से प्राप्त जानकारी से पता चलता है कि विकिरण का कोई असामान्य स्तर नहीं पाया गया है।'