
अमेरिका के टेक्सास से चला एलपीजी कार्गो शिप “पिक्सिस पायनियर” आज रविवार सुबह मंगलुरु के न्यू मंगलौर पोर्ट पहुंचा। (Photo - ANI)
US-Israel-Iran War: ईरान पर पिछले महीने 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद से दुनिया भर के कई देशों को तेल और गैस की कमी से जूझना पड़ रहा है। भारत भी इससे अछूता नहीं है। युद्ध जैसी स्थिति में भारत ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर निर्भरता कम करने के लिए बड़ा कदम उठाया और एलपीजी की आपूर्ति के लिए अमेरिका से संपर्क किया। इसका परिणाम यह हुआ कि अमेरिका के टेक्सास से चला एलपीजी कार्गो शिप “पाइक्विसस पायनियर” आज रविवार सुबह मंगलुरु के न्यू मंगलौर पोर्ट पर पहुंच चुका है।
मिडिल ईस्ट में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जारी संघर्ष अब चौथे चरण में पहुंचकर गंभीर रूप ले चुका है। अमेरिका और इजरायल के हमलों का ईरान लगातार जवाब दे रहा है। इसी कड़ी में ईरान ने इजरायल के अराद (Arad) और डिमोना (Dimona) को मिसाइलों से निशाना बनाया, जिसमें 100 से अधिक लोग घायल हो गए।
पश्चिम एशिया में जारी इस संघर्ष के चलते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है। अमेरिका ने इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को खुला रखने के लिए अपने सहयोगी देशों से सुरक्षा की जिम्मेदारी लेने का आग्रह किया था, लेकिन कोई भी देश इसके लिए आगे नहीं आया। हालांकि, अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है, 'अगर ईरान 48 घंटों के भीतर बिना किसी धमकी के स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह से नहीं खोलता है, तो संयुक्त राज्य अमेरिका उनके विभिन्न पावर प्लांट्स पर हमला करेगा और उन्हें नष्ट कर देगा, जिसकी शुरुआत सबसे बड़े संयंत्र से होगी।'
वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप यह दावा भी कर चुके हैं कि ईरान की सैन्य क्षमताएं काफी कमजोर हो चुकी हैं। उनके अनुसार, ईरान के पास न प्रभावी नौसेना बची है, न वायुसेना, और न ही मजबूत विमानरोधी प्रणाली। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के कई शीर्ष नेता मारे जा चुके हैं, जिससे संकेत मिलता है कि सैन्य अभियान अपने उद्देश्यों के करीब पहुंच रहा है।
उधर, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने मिडिल ईस्ट में बिना किसी विदेशी हस्तक्षेप के शांति, सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए क्षेत्रीय देशों के साथ मिलकर एक सुरक्षा ढांचा बनाने का प्रस्ताव रखा है।
इसके साथ ही उन्होंने युद्ध समाप्त करने के लिए ईरान की शर्तें भी दोहराईं। रिपोर्ट के मुताबिक, उनकी पहली शर्त यह है कि अमेरिका और इजरायल तुरंत अपने हमले बंद करें और यह गारंटी दें कि भविष्य में ऐसे हमले दोबारा नहीं होंगे।
Updated on:
22 Mar 2026 10:02 am
Published on:
22 Mar 2026 10:02 am
