US-Japan Missile Deal: ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण जापान को मिलने वाली 400 टॉमहॉक मिसाइलों की डिलीवरी में देरी हो रही है। जानें कैसे अमेरिकी मिसाइल भंडार में कमी का फायदा चीन को मिल सकता है और क्यों जापान अब स्वदेशी रक्षा विकल्पों पर जोर दे रहा है।
Middle East Conflict Impact: मिडिल-ईस्ट में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध ने अब एशिया की सुरक्षा समीकरणों को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। तभी तो ईरान के खिलाफ जंग में अमेरिका द्वारा बड़ी संख्या में टॉमहॉक मिसाइलों का इस्तेमाल किए जाने के बाद जापान को दी जाने वाली मिसाइल आपूर्ति खटाई में पड़ गई है। जापान ने चीन और उत्तर कोरिया की चुनौतियों से निपटने के लिए अमेरिका से 2024 में 2.35 अरब डॉलर में लगभग 400 टॉमहॉक मिसाइलों का ऑर्डर दिया था, जिसकी समयसीमा मार्च 2028 तय की गई थी। हालांकि, अमेरिकी स्टॉक में आई कमी के कारण अब इन डिलीवरी में देरी की आशंका जताई जा रही है।
ईरान के साथ जारी संघर्ष ने अमेरिकी रक्षा तैयारियों पर भारी दबाव डाला है। रिपोर्ट के मुताबिक, मिडिल-ईस्ट जंग शुरू होने से पहले अमेरिका के पास लगभग 4,000 टॉमहॉक मिसाइलें थीं, लेकिन ईरान पर किए गए हमलों में सैकड़ों मिसाइलें दागी जा चुकी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले दो वर्षों का कुल उत्पादन और अपग्रेडेशन ईरान से जंग के चलते भेंट चढ़ चुका है। पेंटागन अब अपने घरेलू स्टॉक को प्राथमिकता दे रहा है। इसके कारण 'अमेरिका फर्स्ट' नीति के तहत सहयोगियों को दी जाने वाली आपूर्ति पीछे छूट रही है। हालांकि अमेरिकी रक्षा और एयरोस्पेस कंपनी रेथियॉन ने उत्पादन बढ़ाने के लिए समझौता किया है, लेकिन उत्पादन लक्ष्य को 1,000 तक ले जाने में अभी कई साल लग सकते हैं।
जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी और अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ के बीच हुई बातचीत में इस मुद्दे पर चर्चा की गई है। जापान के लिए यह देरी इसलिए चिंताजनक है, क्योंकि उसने हाल ही में अपने युद्धपोत 'चोकाई' को इन मिसाइलों को दागने के लिए अपग्रेड किया था। टॉमहॉक मिसाइलें 1,600 किलोमीटर की दूरी तक मार करने में सक्षम हैं, जो जापान की नई रक्षा नीति का प्रमुख हिस्सा हैं। डिलीवरी में संभावित देरी को देखते हुए जापान अब अपनी स्वदेशी 'टाइप-12' मिसाइलों और हाइपर वेलोसिटी ग्लाइडिंग प्रोजेक्टाइल्स की तैनाती तेज कर रहा है। पूर्व रक्षा अधिकारियों का मानना है कि स्वदेशी तकनीक पर निर्भरता बढ़ाने का जापान का फैसला अब सही साबित हो रहा है।
हाल के कुछ महीनों में जापान और चीन के रिश्ते बेहद खराब हो गए हैं। दोनों देशों के बीच तनाव उस वक्त से बढ़ गया है, जब पिछले साल नवंबर में जापान के प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची की ओर से यह संकेत दिया गया था कि यदि चीन की तरफ से ताइवान पर कोई हमला होता है तो टोक्यो उसमें सैन्य हस्तक्षेप कर सकता है।