US-Israel-Iran War: मोहम्मद अली जाफरी (Mohammad Ali Jafari) वह रणनीतिकार हैं जिन्होंने ईरान की सेना को केंद्रीकृत मॉडल से हटाकर एक ऐसे नेटवर्क में बदला जहां हर यूनिट स्वतंत्र रूप से लड़ सकती है। इससे दुश्मन के लिए सिर्फ शीर्ष नेताओं को मारकर युद्ध खत्म करना लगभग असंभव हो जाता है।
US-Israel-Iran War: अमेरिका और इजरायल पिछले कई दिनों से ईरान पर लगातार हमले कर रहे है लेकिन दोतरफा हमले झेल रहा ईरान अब भी जंग में मजबूती से डटा है। न्यूक्लियर पॉवर नहीं होने के बावजूद ईरान अमेरिका जैसी महाशक्ति का मुकाबला कर रहा है और अब भी घुटने टेकने को तैयार नहीं है। ईरान की इस मजबूती के पीछे अगर किसी को श्रेय जाता है तो वह कोई और नहीं बल्कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के पूर्व कमांडर-इन-चीफ मेजर जनरल मोहम्मद अली जाफरी होंगे।
अमेरिका को लगा था कि वह ईरान का वही हाल करेगा जो उसने 2003 में इराक का किया था। इस दौरान अमेरिका ने सिर्फ 26 दिनों में सद्दाम हुसैन की पूरी सैन्य शक्ति को खत्म कर दिया था। यही सपना लेकर अमेरिका ने ईरान पर हमला किया लेकिन वह नहीं जानता था कि ईरान के मास्टरमाइंड कहे जाने वाले अली जाफरी ने इस पूरे हमले का बहुत ही बारिकी से अध्ययन किया था और यह कसम खाई थी कि वह इराक जैसा हाल ईरान का नहीं होने देगा।
इजरायल और अमेरिका की सेनाओं ने मिलकर 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ एक बहुत बड़ा सैन्य अभियान चलाया था। अमेरिका ने इसे 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' नाम दिया था। इस ऑपरेशन का उद्देश्य ईरान के सुप्रीम लीडर और सैन्य कमांडरों को खत्म करना था। इसी उद्देश्य के साथ आधुनिक युद्धक विमानों, ड्रोन्स और सटीक निशाना लगाने वाली मिसाइलों से ईरान पर हमला किया गया। इन हमलों ने ईरान में भारी तबाही मचाई और उसके सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की भी मौत हो गई। खामेनेई के साथ-साथ इन हमलों में ईरानी सेना (IRGC) के चीफ मोहम्मद पाकपुर, रक्षा मंत्री अजीज नासिरजादेह और सेना के चीफ ऑफ स्टाफ सैयद अब्दोलरहीम मौसवी समेत कई बड़े अधिकारी भी मारे गए।