
Trump Student Visa Rule Changes: अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने अमेरिकी छात्र वीजा व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। जिससे अमेरिका में पढ़ाई करने का सपना देख रहे विदेशी छात्रों, जिसमें भारतीय भी शामिल है, उनके लिए झटका माना जा रहा है। प्रशासन ने अब तक लागू ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस व्यवस्था को खत्म कर इसकी जगह निश्चित अवधि का नियम लागू किया गया है।
इसको लेकर अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी ने इसको लेकर नियम जारी कर दिया है। नियम के तहत F-1 स्टूडेंट वीजा और J-1 एक्सचेंज विजिटर वीजा धारकों को अब एक बार में अधिकतम चार साल तक ही अमेरिका में रहने की अनुमति मिलेगी। यह नियम अधिसूचना जारी होने के 60 दिन बाद कांग्रेस की समीक्षा प्रक्रिया पूरी होने के बाद लागू होगा।
अब तक विदेशी छात्र अपनी पढ़ाई पूरी होने तक अमेरिका में रह सकते थे, बशर्ते वे मान्यता प्राप्त संस्थान में नामांकित रहें और वीजा की सभी शर्तों का पालन करें। इसे स्थिति की अवधि (D/S) कहा जाता था।
अब नए नियम के तहत अधिकांश छात्रों को केवल 4 साल तक रहने की अनुमति मिलेगी। यदि किसी छात्र का कोर्स चार साल से लंबा है, तो उसे वीजा अवधि बढ़ाने के लिए आवेदन करना होगा या फिर अमेरिका छोड़कर दोबारा वीजा लेकर प्रवेश करना होगा।
नए नियमों के अनुसार छात्र अब बिना पूर्व अनुमति के अपना सबजेक्ट नहीं बदल सकेंगे। इसके अलावा डिग्री प्रोग्राम बदलने पर मंजूरी लेनी होगी। किसी दूसरी यूनिवर्सिटी में ट्रांसफर करने के लिए भी अमेरिकी इमिग्रेशन अधिकारियों की अनुमति जरूरी होगी।
सरकार का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य छात्र वीजा के दुरुपयोग को रोकना और विदेशी छात्रों की बेहतर निगरानी करना है।
फिलहाल पढ़ाई पूरी होने के बाद छात्रों को 60 दिन का ग्रेस पीरियड मिलता था, ताकि वे अमेरिका छोड़ सकें, वैकल्पिक व्यावहारिक प्रशिक्षण (OPT) शुरू कर सकें या अपना वीजा स्टेटस बदल सकें। नए नियम के तहत यह अवधि घटाकर 30 दिन कर दी गई है।
DHS के मुताबिक, स्थिति की अवधि व्यवस्था के कारण कई छात्र लगातार नए कोर्स, रिसर्च या अन्य कार्यक्रमों के जरिए लंबे समय तक अमेरिका में बने रहते थे, जिससे उनकी निगरानी करना मुश्किल हो जाता था।
सरकार का कहना है कि तय समय सीमा लागू होने से इमिग्रेशन सिस्टम अधिक पारदर्शी होगा और यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि छात्र पूरे समय वीजा नियमों का पालन कर रहे हैं।
इस फैसले का सबसे अधिक प्रभाव उन छात्रों पर पड़ेगा जिनके कोर्स चार साल से अधिक लंबे होते हैं। इनमें शामिल हैं.
भारतीय छात्रों पर भी इसका सीधा असर पड़ सकता है। उन्हें अब अतिरिक्त वीजा प्रक्रिया, अधिक खर्च और भविष्य की पढ़ाई व करियर की योजना बनाते समय नई समय-सीमा का ध्यान रखना होगा।