
ईरान के पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद (Photo-ANI)
Iran Israel Intelligence Report: अमेरिका और ईरान के तनाव के बीच अखबार द न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में बड़ा दावा किया है। रिपोर्ट में बताया गया कि इजरायल ने कई वर्षों तक एक गुप्त अभियान चलाया, जिसमें ईरान के पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद को अपने संभावित खुफिया स्रोत (इंटेलिजेंस एसेट) और भविष्य में ईरान में सत्ता परिवर्तन की स्थिति में संभावित नेता के रूप में तैयार करने की कोशिश की। अखबार ने यह रिपोर्ट इजरायली और ईरानी अधिकारियों के हवाले से प्रकाशित की है।
यह दावा इसलिए भी चौंकाने वाला है क्योंकि महमूद अहमदीनेजाद अपने राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान इजरायल के सबसे कट्टर विरोधियों में गिने जाते थे। उन्होंने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को तेजी से आगे बढ़ाया, कई बार इजरायल के अस्तित्व को खत्म करने की बात कही और होलोकॉस्ट पर भी विवादित बयान दिए थे।
हालांकि, राष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद जब अहमदीनेजाद और ईरान की सत्ता के शीर्ष नेतृत्व के बीच दूरियां बढ़ने लगीं, तब इज़रायली खुफिया एजेंसी मोसाद ने उन्हें एक संभावित राजनीतिक विकल्प के रूप में देखना शुरू किया।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि तत्कालीन मोसाद प्रमुख डेविड बरनिया ने हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में अहमदीनेजाद से गुप्त मुलाकात की थी। मुलाकात के बाद मोसाद ने अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA को सूचित किया कि पूर्व ईरानी राष्ट्रपति के साथ संपर्क स्थापित कर लिया गया है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि राष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद अहमदीनेजाद की राजनीतिक छवि में बड़ा बदलाव देखने को मिला। उन्होंने ईरान की सुरक्षा एजेंसियों और सरकारी भ्रष्टाचार की खुलकर आलोचना की। इसके अलावा अपनी पारंपरिक पहचान बदलकर आधुनिक छवि अपनाई और खुद को अपेक्षाकृत उदार नेता के रूप में पेश करने की कोशिश की। साथ ही वे पूरे ईरान में अपने समर्थकों से लगातार संपर्क बनाए रखते रहे।
रिपोर्ट के मुताबिक, अहमदीनेजाद के एक करीबी सहयोगी का कहना है कि उन्हें एहसास हो गया था कि मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था में उनकी सत्ता में वापसी संभव नहीं है। ऐसे में यदि ईरान की सत्ता व्यवस्था कमजोर होती है तो वे खुद को एक सुधारवादी नेता के रूप में स्थापित कर सकते हैं।
द न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, इजरायली खुफिया एजेंसियां अहमदीनेजाद और सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के बीच बढ़ते मतभेदों पर लगातार नजर रख रही थीं। रिपोर्ट में कहा गया है कि अहमदीनेजाद की शीर्ष नेतृत्व के प्रति नाराज़गी को इज़रायल ने एक रणनीतिक अवसर के रूप में देखा।
महमूद अहमदीनेजाद वर्ष 2005 से 2013 तक ईरान के छठे राष्ट्रपति रहे। उनके कार्यकाल के दौरान आर्थिक नीतियों, मानवाधिकारों और विदेश नीति को लेकर देश और दुनिया में व्यापक आलोचना हुई। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वे इज़रायल, अमेरिका, ब्रिटेन और कई पश्चिमी तथा अरब देशों के खिलाफ अपने तीखे बयानों के कारण लगातार चर्चा में रहे।
साल 2009 में उनकी विवादित चुनावी जीत के बाद ईरान में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। दूसरे कार्यकाल में उनका संसद, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड, सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और अन्य सत्ता संस्थानों से भी टकराव बढ़ गया। संवैधानिक प्रावधानों के कारण वे लगातार तीसरी बार राष्ट्रपति चुनाव नहीं लड़ सके।
Updated on:
14 Jul 2026 04:32 pm
Published on:
14 Jul 2026 04:32 pm
