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‘हम खामेनेई की मौत का बदला लेकर रहेंगे, हॉर्मुज से नहीं हटेगी हमारी सेना’, अमेरिकी हमले के बाद ईरान का बयान

strait of hormuz: ईरान ने साफ कहा - अमेरिकी आक्रामकता से हॉर्मुज स्ट्रेट कभी नहीं खुलेगा। सेना के प्रवक्ता ने बड़ा बयान दिया है।
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भारत

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Mukul Kumar

Jul 14, 2026

IRGC claims strike on US forces

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई। ( फोटो: ANI)

अमेरिका और ईरान का तनाव अब फिर से युद्ध में तब्दील हो गया है। अमेरिका ने मंगलवार को ईरान के कई ठिकानों को निशाना बनाया है। वहीं, ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई की है।

इस बीच, ईरान ने साफ कहा है कि अमेरिका की किसी भी आक्रामकता या दबाव से स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज नहीं खुलेगा। ईरान सेना ने कहा है कि युद्ध, बुराई या अमेरिकी आक्रामकता से यह रणनीतिक जलमार्ग कभी नहीं खुलेगा।

हॉर्मुज को लेकर कोई समझौता नहीं

ईरानी सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद अकरामिनिया ने तस्नीम न्यूज एजेंसी को दिए बयान में जोर देकर कहा कि ईरान अपने इस अहम जलमार्ग पर किसी भी हालत में समझौता नहीं करेगा।

जनरल अकरामिनिया ने कहा कि ईरानी सशस्त्र बल इस स्ट्रेट पर अपनी पकड़ मजबूत रखेंगे। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि ईरानी लोगों के अधिकारों का सम्मान ही इस जलमार्ग को खोलने का एकमात्र रास्ता है। ईरान इस बात पर अड़ा है कि कोई भी बाहरी ताकत उसे मजबूर नहीं कर सकती।

मिडिल ईस्ट में बढ़ रहा तनाव

यह बयान ऐसे समय आया है जब मध्य पूर्व में तनाव लगातार बढ़ रहा है। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के साथ ईरान के रिश्ते पहले से ही खराब चल रहे हैं। ईरान का कहना है कि वह अपनी संप्रभुता और लोगों के हितों की रक्षा के लिए हर कदम उठाएगा।

जनरल अकरामिनिया ने यह भी कहा- हम शहीदों के खून का बदला लेकर रहेंगे हैं, हम इस्लामिक क्रांति के शहीद लीडर अली अयातुल्ला खामेनेई को मारने वाले को किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे।

हॉर्मुज क्यों है इतना अहम?

दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल सप्लाई के लिए स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर निर्भर है। यह जलमार्ग फारस की खाड़ी को खुली समुद्र से जोड़ता है। यहां से रोजाना लाखों बैरल तेल गुजरता है। अगर यह रास्ता बंद हो जाए तो पूरी दुनिया में तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं।

ईरान कई बार पहले भी चेतावनी दे चुका है कि अगर उसे खतरा महसूस हुआ तो वह इस जलमार्ग को बंद कर सकता है। लेकिन इस बार का बयान और भी मजबूत है। ईरान खुद को क्षेत्रीय ताकत मानता है और किसी भी विदेशी हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं करना चाहता।