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ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम साइट पर अमेरिकी हमले की धमकी, सीमा के पास US सैनिकों की तैनाती की प्लानिंग

US Iran Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समझौता टूटने के बाद अब तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका ने ईरान के एक न्यूक्लियर प्रोग्राम से जुड़ी एक साइट पर हमले की धमकी दी है।
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अमेरिका ने ईरान को बड़े हमले की दी धमकी, photo- patrika

US Iran Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समझौता टूटने के बाद अब तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका ने ईरान के एक न्यूक्लियर प्रोग्राम से जुड़ी एक साइट पर हमले की धमकी दी है। इसके अलावा ईरान की सीमा के नजदीक अमेरिकी सैनिकों की तैनाती को लेकर भी बड़े स्तर पर प्लानिंग शुरू कर दी है। अमेरिकी हमलों में ईरानी एयर डिफेंस सिस्टम, कोस्टल रडार, मिसाइल और ड्रोन साइट्स के साथ-साथ छोटी नावों और दूसरे समुद्री एसेट्स को भी निशाना बनाया गया है।

होर्मुज स्ट्रेट जबरदस्ती खोलना मकसद

ईरान पर हाल ही में अमेरिका के हमलों की बढ़ोतरी के पीछे सबसे बड़ा मकसद होर्मुज स्ट्रेट को जबरदस्ती खोलना है। इसके अलावा अमेरिका ईरानी सैन्य क्षमताओं को भी निशाना बना रहा है। जिन्हें अमेरिका ईरान के खिलाफ और मुश्किल ऑपरेशन करने से पहले खत्म करना चाहता है।

ईरान के न्यूक्लियर प्लांट साइट पर हमले की धमकी

ट्रंप ने ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम से जुड़ी एक साइट पर भी हमला करने की धमकी दी है, जिसे पिकैक्स माउंटेन के नाम से जाना जाता है, यह तेहरान की मुख्य न्यूक्लियर साइट्स में से एक के पास जमीन के नीचे दबी एक मजबूत फैसिलिटी है।

सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज़ के रिटायर्ड US मरीन ऑफिसर मार्क कैनसियन ने कहा कि खार्ग आइलैंड पर कब्जा करने जैसे मिलिट्री ऑप्शन पर पब्लिक में बात करने की ट्रंप की इच्छा दोधारी तलवार है।

ईरान के पास भारी सैन्य क्षमता मौजूद

अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमलों से ईरान की सेना को भारी नुकसान होने के बावजूद, तेहरान के पास अब भी ड्रोन और मिसाइल की अच्छी-खासी कैपेबिलिटी है और उसने स्ट्रेट में गुजरने वाले टैंकरों के साथ-साथ अपने खाड़ी देशों के पड़ोसियों पर भी हमला किया है। वहीं अमेरिकी हमलों में ईरानी एयर डिफेंस सिस्टम, कोस्टल रडार, मिसाइल और ड्रोन साइट्स के साथ-साथ छोटी नावों और दूसरे समुद्री एसेट्स को भी निशाना बनाया गया है।

अमेरिकी सेना की तैनाती की योजना

सूत्रों के अनुसार अमेरिकी सेना ईरान के किनारे पर US सैनिकों को तैनात करने के ऑप्शन बनाने की प्लानिंग कर रही है ताकि स्ट्रेट को बेहतर तरीके से सुरक्षित किया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन ने ईरान के खार्ग आइलैंड पर ग्राउंड फोर्स भेजने पर भी चर्चा की थी, जो ईरान के 90 परसेंट तेल एक्सपोर्ट का हब है। ऐसा ऑपरेशन रिस्की होगा, क्योंकि ईरान मेनलैंड से आइलैंड पर मिसाइलों और ड्रोन से हमला कर सकता है।