
US-Iran War: ईरान के खिलाफ अपने सैन्य अभियान का विस्तार करने के लिए डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन तैयारियों में जुट गया है। इसके तहत अमेरिका दर्जनों अतिरिक्त सैन्य रिफ्यूलिंग विमान इजरायल भेजना चाहता है, ताकि जरूरत पड़ने पर लड़ाकू विमानों को हवा में ही ईंधन भरकर लंबे समय तक अभियान चलाया जा सके। यह दावा अमेरिकी और इजरायली अधिकारियों के हवाले से Axios की रिपोर्ट में किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित तैनाती की खबर उस समय सामने आई, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सप्ताह की शुरुआत में सिचुएशन रूम की बैठक के दौरान कई सैन्य विकल्पों की समीक्षा की थी।
रिपोर्ट के अनुसार, कई अन्य विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है। इनमें ईरान के ऊर्जा और नागरिक बुनियादी ढांचे तथा उसके परमाणु ठिकानों पर और अधिक हमले कर समृद्ध यूरेनियम के भंडार को नष्ट करना, साथ ही निर्माणाधीन भूमिगत पिकैक्स माउंटेन स्थल पर हमला करना शामिल है।
Axios के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी तक सैन्य अभियान के विस्तार पर अंतिम फैसला नहीं लिया है। फिलहाल वह व्यापक सैन्य कार्रवाई के विकल्प पर विचार कर रहे हैं। इसका उद्देश्य ईरान पर इतना दबाव बनाना है कि वह हॉर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को दोबारा खोलने और परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी अमेरिकी मांगों को स्वीकार करने के लिए तैयार हो जाए।
अमेरिकी और इजरायली अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि आने वाले कुछ दिनों में इस सैन्य विस्तार का आदेश दिया जा सकता है। यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है, जब अमेरिकी सेना लगातार कई दिनों से हॉर्मुज स्ट्रेट और दक्षिणी ईरान के आसपास ईरानी ठिकानों पर हमले कर रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा समय में अमेरिका के लगभग 30 सैन्य रिफ्यूलिंग विमान तेल अवीव के निकट स्थित बेन गुरियन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर है। इसके अलावा लगभग इतने ही विमान दक्षिणी इजरायल के रामोन एयरपोर्ट पर तैनात हैं।
इजरायली अधिकारियों ने बताया कि अमेरिका आने वाले दिनों में कई दर्जन और रिफ्यूलिंग विमान तैनात करने की योजना बना रहा है। इससे इन विमानों की संख्या संघर्ष की शुरुआत के समय के स्तर तक पहुंच जाएगी।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सेना इन विमानों का संचालन मुख्य रूप से बेन गुरियन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से करना चाहती है, क्योंकि क्षेत्र के अन्य सैन्य एयरबेस संभावित ईरानी हमलों के प्रति अधिक संवेदनशील माने जाते हैं।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अतिरिक्त अमेरिकी विमानों की तैनाती इजरायल में एक राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दा बन गई है। एक ओर इजरायल की परिवहन मंत्री मिरी रेगेव ने अमेरिकी विमानों की संख्या कम करने या उन्हें किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने की मांग की है। वहीं, इजरायल के रक्षा मंत्रालय और इजरायल डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने इसका विरोध किया है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ट्रंप प्रशासन ने अतिरिक्त विमानों की तैनाती के संबंध में औपचारिक रूप से इजरायल सरकार से अनुरोध किया है। फिलहाल इस संबंध में अंतिम निर्णय इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू लेंगे।