
अमेरिका और ईरान के बीच आज स्विट्जरलैंड में आज बातचीत होगी। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची बातचीत करेंगे। अमेरिकी मीडिया समूह एक्सियोस ने रिपोर्ट किया है कि वाशिंगटन इस मीटिंग के जरिए चाहता है कि बातचीत के बाद ईरान, संयुक्त राष्ट्र के निरीक्षकों को परमाणु केंद्रों का दौरा करने की इजाजत दे। जिन केंद्रों पर अमेरिका और इजरायल ने बमबारी की थी। इसके बदले में अमेरिका ईरान का फ्रीज किया हुआ 6 अरब डॉलर रिलीज करेगा। जिनका इस्तेमाल ईरान मानवीय सहायता के लिए कर सकता है।
वहीं, अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट में यह बात कही गई है कि इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू किसी भी तरीके से ईरान-अमेरिका शांति समझौते को लेकर होने वाली बातचीत को पटरी से उतारने की कोशिश कर सकते हैं। अगर नेतन्याहू लेबनान में इजरायली सैनिकों की मौजूदगी बनाए रखते हैं तो स्विट्जरलैंड में होने वाली बातचीत पर इसका असर पड़ सकता है। यदि उन्होंने लेबनान से सैनिकों को हटाने का फैसला किया तो इससे उनका घरेलू राजनीति में प्रभाव घट सकता है। लेबनान के मोर्चे को लेकर इजरायली अधिकारी ने अमेरिकी मीडिया चैनल से बात करते हुए कहा कि हमारा मकसद साफ है। हम इजरायली नागरिकों को हिजबुल्लाह के हमलों से बचाना चाहते हैं।
उपराष्ट्रपति वेंस ने जॉइंट बेस एंड्रयूज पर अपने एयरक्राफ्ट में चढ़ने से पहले मीडिया से बताया कि उनकी समझ से ईरानी नेगोशिएटर पहले ही स्विट्जरलैंड पहुंच चुके हैं और बातचीत शायद कई दिनों तक चलेगी। वेंस ने कहा कि मुझे लगता है कि हम उम्मीद है कि न्यूक्लियर मुद्दे पर प्रोग्रेस करेंगे, लेबनान सीजफायर मुद्दे पर आगे बढ़ेंगे। ये दो बड़ी बातें हैं जिन पर मुझे लगता है कि हमें फोकस करना है। मुझे यकीन है कि ईरानियों के भी कुछ मुद्दे होंगे जिन पर वे चर्चा करना चाहेंगे।
ईरान के संयुक्त मिलिट्री कमांड ने कहा कि इजरायल द्वारा लेबनान में लगातार हमले किए जाने विरुद्ध में वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर रहा है। ईरानी सेना ने कहा कि लेबनान में इजरायली कार्रवाई वाशिंगटन की बुरी नीयत को दर्शाता है। बता दें कि ईरान और अमेरिका द्वारा शांति समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खुल गया था। US ने भी ईरानी पोर्ट पर अपनी नेवल नाकाबंदी हटा ली, जिससे वह बंद खत्म हो गया था।