Peace Plan: होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए दर्जनों देशों ने दबाव बढ़ा दिया है। इस बीच, अमेरिका भी ईरान द्वारा पेश किए गए शांति प्रस्ताव की गंभीरता से समीक्षा कर रहा है, जिससे संभावित युद्ध का खतरा टल सके।
Reviewing: दुनिया भर के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आ सकती है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे भारी तनाव के बीच कूटनीतिक समाधान की उम्मीद जागी है। अमेरिका फिलहाल ईरान की ओर से पेश किए गए एक शांति प्रस्ताव (Reviewing) की बारीकी से जांच कर रहा है। दरअसल, दर्जनों देशों ने होर्मुज जलडमरूमध्य को वैश्विक व्यापार के लिए तुरंत खोलने की मांग की है, जिसके बाद वाशिंगटन पर कूटनीतिक रास्ता अपनाने का दबाव काफी बढ़ गया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक रास्तों में से एक है। यहाँ से दुनिया के कुल कच्चे तेल का लगभग 20 से 30 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। इस मार्ग के बंद होने या यहाँ तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि होने का डर रहता है, जिसका सीधा असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। यही वजह है कि यूरोपीय देशों से लेकर एशियाई देशों तक, सभी ने इसे जल्द से जल्द सामान्य करने की गुहार लगाई है।
ईरान ने इस संकट को टालने के लिए एक 'पीस प्लान' (शांति योजना) का प्रस्ताव दिया है। इस योजना के तहत क्षेत्र में शांति बहाल करने और सैन्य तनाव को कम करने की बात कही गई है। अमेरिकी प्रशासन अब इस बात का मूल्यांकन कर रहा है कि ईरान का यह प्रस्ताव कितना भरोसेमंद है। अमेरिका अपने सहयोगियों के हितों और अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ही कोई ठोस कदम उठाना चाहता है।
अगर अमेरिका इस शांति योजना को हरी झंडी दे देता है, तो मध्य पूर्व में मंडरा रहा युद्ध का बड़ा खतरा टल सकता है। दोनों देशों के बीच बातचीत शुरू होने से खाड़ी क्षेत्र में स्थिरता आएगी और वैश्विक व्यापारिक जहाजों की आवाजाही बिना किसी डर के हो सकेगी।
इस खबर के बाहर आते ही वैश्विक शेयर बाजारों और तेल बाजारों में थोड़ी राहत देखने को मिली है। फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन जैसे यूरोपीय देशों ने अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक पहल का स्वागत किया है। उनका मानना है कि बातचीत ही इस संकट का एकमात्र और स्थायी समाधान है।
आने वाले दिनों में संयुक्त राष्ट्र (UN) या किसी तटस्थ देश (जैसे ओमान या स्विट्जरलैंड) की मध्यस्थता में दोनों देशों के अधिकारियों के बीच गुप्त या खुली बैठकें हो सकती हैं। दुनिया भर की मीडिया की नजर व्हाइट हाउस के अगले आधिकारिक बयान पर टिकी है।
इस पूरे घटनाक्रम का सीधा असर भारत और चीन जैसे बड़े तेल आयातकों पर पड़ रहा है। होर्मुज में तनाव के कारण सप्लाई चेन बाधित होने का डर बना हुआ था। शांति समझौते की सुगबुगाहट से एशियाई बाजारों को भी बड़ी राहत मिली है, क्योंकि इससे तेल की कीमतों में स्थिरता आने की पूरी संभावना है।