
Iran Airlines Sanctions: अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने ईरान की सभी एयरलाइंस को बंद करने की धमकी दी थी। अमेरिका की इस धमकी के बाद चीन की प्रतिक्रिया आई है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि चीन ऐसे गैर-कानूनी और एकतरफा प्रतिबंधों का विरोध करता है। इन प्रतिबंधों के लिए कोई भी अंतरराष्ट्रीय कानूनी आधार नहीं है।
चीन की इस प्रतिक्रिया से पहले बेसेंट ने कहा था कि ट्रंप प्रशासन ईरान पर भारी आर्थिक दबाव बनाना चाहता है। अमेरिकी प्रतिबंधों के दबाव में सभी ईरानी एयरलाइंस कुूछ ही दिनों में बंद हो जाएंगी। बेसेंट ने कहा था कि 23 सितंबर से ईरान की एयरलाइंस के साथ-साथ ईरानी विमानों को ईंधन, लैंडिंग की सुविधा देने या टिकट देने वाली विदेशी कंपनियों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
अमेरिका ईरानी एयरलाइंस के साथ इसको चलाने में मदद करने वाली कंपनियों पर भी दबाव डालने की कोशिश कर रहा है। बेसेंट ने कहा कि ऐसी कंपनियों को अमेरिकी डॉलर सिस्टम से बाहर किया जा सकता है। यानी कंपनी पर अमेरिकी प्रतिबंध लगने के बाद उसके लिए अमेरिकी बैंकों के जरिए डॉलर में लेन-देन करना मुश्किल हो सकता है।
अमेरिका की यह धमकी नई नहीं है। इससे पहले भी अमेरिका ने ईरान की एयरलाइंस के खिलाफ ऐसी कार्रवाई की धमकी दी थी। 8 सितबंर को बेसेंट ने 27 ईरानी एयरलाइंस को बैन करने का फैसला लिया था। अमेरिका ने इन पर ईरान की सैन्य गतिविधियों में मदद करने का आरोप लगाया था। अमेरिका का दावा था कि इन एयरलाइंस के जरिए हथियार, कर्मचारी और अवैध सामान की आवाजाही हो रही है।
ईरान की एयरलाइन को बंद करने की धमकी ऐसे समय में आई है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच आगामी शिखर सम्मेलन में मीटिंग होगी।
वहीं, इस धमकी से एक दिन पहले बेसेंट और चीन के उप-प्रधानमंत्री हे लिफेंग (He Lifeng) के बीच न्यूयॉर्क में बातचीत हुई थी। ऐसे में चीन की ईरान के पक्ष में इस तरह से प्रतिक्रिया देना अहम है।