विदेश

US Senate Tariff Bill: रूस से तेल खरीदने पर बढ़ा दबाव, भारत-चीन पर 100% टैरिफ वाला बिल अमेरिकी सीनेट से पास

US Senate Tariff Bill: अमेरिकी सीनेट ने रूस से तेल-गैस खरीदने वाले भारत, चीन समेत 5 देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने वाला बिल 86-11 वोटों से पास किया है। ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ अब हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में जाएगा। बिल पास होने और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मंजूरी मिलने पर यह कानून बन जाएगा। जानिए रूस से भारत की तेल खरीद क्यों बढ़ी। पढ़ें पूरी रिपोर्ट
2 min read
Aug 08, 2026
US Senate passes tariff bill against India and China.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Photo- ANI)

100% Tariff on India: अमेरिकी सीनेट ने भारत-चीन समेत 5 देशों पर 100% तक का टैरिफ लगाने वाला बिल पास कर दिया है। इस बिल के मुताबिक, तेल-गैस खरीदने पर भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान पर 100% तक टैरिफ लगाया जा सकता है। अमेरिकी सांसदों का कहना है कि इसका उद्देश्य यूक्रेन में युद्ध के लिए रूस की वित्तीय मदद को कमजोर करना है, ताकि उसकी युद्ध क्षमता को कमजोर किया जा सके।

हालांकि, यह अभी कानून नहीं बना है। इसे अमेरिकी संसद के निचले सदन यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स (अमेरिकी प्रतिनिधि सभा) में भेजा जाएगा। यदि यह बिल हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में पास हो जाता है तो इसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। उनकी मंजूरी मिलने के बाद यह कानून बन जाएगा। कानून बनने के बाद इसका भारत से अमेरिका को होने वाले निर्यात पर सीधा असर पड़ सकता है।

सीनेट में 86-11 वोटों से पारित हुआ बिल

अमेरिकी सीनेट में यह बिल 86-11 वोटों से भारी बहुमत के साथ पारित हुआ। इसे ‘लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ नाम दिया गया है। इस बिल के प्रमुख समर्थक रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम की 11 जुलाई को कीव की यात्रा के बाद मृत्यु हो गई थी।

भारत के लिए क्यों अहम?

चीन के बाद भारत रूसी कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है। इससे पहले अमेरिका अगस्त 2025 में रूसी तेल खरीदने को लेकर भारत से आने वाले कुछ सामान पर अतिरिक्त 25% टैरिफ लगा चुका है। यहां तक कि कुछ भारतीय उत्पादों पर कुल टैरिफ 50% तक पहुंच गया था।

यह बिल हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में पास होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले पांच प्रमुख देशों चीन, भारत, अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है। दूसरे शब्दों में, इन देशों से अमेरिका निर्यात होने वाले उत्पादों पर अमेरिका 100% तक टैरिफ लगा सकता है।

यह बिल 1996 के ईरान प्रतिबंध कानून की अवधि को 2031 तक बढ़ाने का भी प्रावधान करता है। यह कानून ईरान के ऊर्जा क्षेत्र में निवेश करने वाली कंपनियों पर प्रतिबंध लगाता है। बिल में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, रूसी अरबपतियों, वरिष्ठ अधिकारियों और क्रेमलिन से जुड़े वित्तीय संस्थानों पर नए प्रतिबंध लगाने का भी प्रावधान है।

रूस से भारत की तेल खरीद क्यों बढ़ी?

रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद 2022 में वैश्विक ऊर्जा बाजार में बदलाव आया। ऐसे में भारत रूस से मिलने वाला सस्ता कच्चा तेल बड़े पैमाने पर खरीदने लगा। इससे भारतीय रिफाइनरियों को लागत नियंत्रित करने और ईंधन की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिली।

उधर, पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण होर्मुज स्ट्रेट के जरिए शिपिंग प्रभावित होने के बाद भारत की रूसी तेल पर निर्भरता और बढ़ी। भारतीय रिफाइनरियों ने वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत के रूप में रूसी तेल पर अधिक भरोसा किया।

भारत सरकार लगातार कहती रही है कि देश की ऊर्जा खरीद राष्ट्रीय हित और ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखकर की जाती है। माना जा रहा है कि बिल आगे बढ़ने पर नई दिल्ली इसी रुख को दोहराएगी।

Updated on:
08 Aug 2026 07:09 am
Published on:
08 Aug 2026 07:06 am