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रूस से तेल-गैस खरीदना भारत को पड़ेगा महंगा? 100% टैरिफ वाले बिल को अमेरिकी सीनेट की हरी झंडी

US tariffs on India: अमेरिकी सीनेट ने रूस प्रतिबंध बिल को आगे बढ़ाने की मंजूरी दे दी है। इस बिल के कानून बनने पर भारत समेत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाया जा सकता है।
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Jul 29, 2026
US Senate advances Russia sanctions bill.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पीएम मोदी। (Photo- IANS)

Russia sanctions Bill: यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के उद्देश्य से अमेरिकी सीनेट ने एक कड़े प्रतिबंध विधेयक को हरी झंडी दे दी है। इस विधेयक के कानून बनने पर भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान पर 100% तक भारी टैरिफ लगाने का रास्ता साफ हो सकता है। इसका मुख्य लक्ष्य इन देशों की रूसी ऊर्जा (तेल-गैस) पर निर्भरता को खत्म करना है। दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम द्वारा तैयार किया गया यह बिल मंगलवार को यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की के अमेरिकी दौरे के दौरान पेश किया गया। वोटिंग के दौरान बिल को भारी समर्थन मिला। बिल के पक्ष में 86 और विरोध में केवल 12 वोट पड़े।

भारत की चिंता बढ़ी

अमेरिकी सीनेट इस विधेयक को ऐसे समय हरी झंडी दी है, जब पश्चिम एशिया में जारी जंग की वजह से भारत तो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए रूस पर निर्भर रहना पड़ रहा है। वहीं फरवरी 2026 में अमेरिका-ईरान जंग के चलते होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते होने वाला व्यापार बाधित हुआ है। खाड़ी देशों से भारत कुल कच्चे तेल का 40 फीसदी आयात करता है, लेकिन अमेरिका-ईरान जंग और होर्मुज स्ट्रेट में आवाजाही बाधित होने से भारतीय रिफाइनरियों को रूस की तरफ रुख करना पड़ा है।

होर्मुज की नाकेबंदी से उत्पन्न वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच अमेरिका ने भारत को रूसी तेल पर अस्थायी छूट दी थी। इस छूट के बाद जून 2026 में भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात 34% बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर' की रिपोर्ट के मुताबिक, जून में भारत का रूसी तेल आयात 4.5 अरब यूरो रहा, जो रूस के कुल कच्चे तेल निर्यात राजस्व का लगभग 36% है।

भारत और अमेरिकी रिश्तों पर असर

चीन के बाद भारत रूसी कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है। ऐसे में यदि भारत पर अमेरिकी की तरफ से कड़े प्रतिबंध लगाए जाते हैं तो निश्चित तौर पर दोनों देशों के रिश्तों पर असर पड़ सकता है।

यह ध्यान रखने वाली बात यह है कि अगस्त 2025 में भी अमेरिका ने 'व्लादिमीर पुतिन के युद्ध को बढ़ावा' देने का आरोप लगाते हुए भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाया था। इसके साथ ही भारत पर कुल अमेरिकी टैरिफ बढ़कर 50% हो गया था, जो चीन और ब्राजील के बराबर था। इस कदम से दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया था और द्विपक्षीय व्यापारिक वार्ताएं ठप हो गई थीं।

सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल के पूर्व बयान के मानें तो उन देशों को प्रतिबंधों से छूट दी जाएगी, जिनकी रूसी गैस की खरीद रूस के कुल गैस निर्यात के 15 प्रतिशत से कम है। हालांकि, मौजूदा ऊर्जा संकट के बीच तेल आयात पर सख्त टैरिफ की यह चेतावनी भारत समेत अन्य देशों के लिए बड़ी आर्थिक चुनौती बन सकती है।

Updated on:
29 Jul 2026 09:21 am
Published on:
29 Jul 2026 09:21 am