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वेस्ट बैंक में इजरायली सेना की कार्रवाई, हेब्रोन के पास गांव से पानी के टैंकर जब्त, चालकों को हिरासत में लिया

Masafer Yatta Water Conflict: हेब्रोन के पास अल-करमेल गांव में इजरायली सेना ने मसाफेर यट्टा के लिए पानी ले जा रहे दो टैंकर जब्त किए। वफा के अनुसार, दोनों चालकों को हिरासत में लेकर सैन्य शिविर की ओर ले जाया गया। पढ़ें पूरी खबर...
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भारत

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Pratiksha Gupta

Sep 22, 2026

Hebron Israeli military raid, Al Karmel village

वेस्ट बैंक में इजरायली सेना की कार्रवाई, हेब्रोन के पास गांव से पानी के टैंकर जब्त (फाइल फोटो)

Masafer Yatta Water Conflict: वेस्ट बैंक में इजरायली सेना की कार्रवाई को लेकर एक और मामला सामने आया है। फिलिस्तीनी समाचार एजेंसी वफा के अनुसार, हेब्रोन के पास अल-करमेल गांव में इजरायली सेना ने कार्रवाई करते हुए पानी पहुंचाने वाले दो टैंकर जब्त कर लिए। बताया गया है कि दोनों टैंकर चालक भी हिरासत में लिए गए हैं।

पानी के टैंकर जब्त, ड्राइवरों को साथ ले गई सेना

फिलिस्तीनी समाचार एजेंसी वफा की रिपोर्ट के अनुसार, जब्त किए गए पानी के टैंकर अत-तवानी गांव परिषद के थे। ये टैंकर मसाफेर यट्टा के सुदूर इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों तक पीने का पानी पहुंचाने का काम कर रहे थे। स्थानीय सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि इजरायली सेना ने सिर्फ टैंकर ही जब्त नहीं किए, बल्कि दोनों चालकों को भी हिरासत में ले लिया है। इसके बाद उन्हें मसाफेर यट्टा में स्थित एक इजरायली सैन्य शिविर (मिलिट्री कैंप) की तरफ ले जाया ग

पानी जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए तरस रहे लोग

यह घटना मसाफेर यट्टा और उसके आसपास के इलाकों में जारी व्यापक सैन्य सख्ती का हिस्सा मानी जा रही है। लगातार हो रही इस सख्ती की वजह से स्थानीय लोगों को पीने के पानी जैसी सबसे जरूरी चीज के लिए भी तरसना पड़ रहा है। पानी की किल्लत की वजह से ग्रामीणों की मुश्किलें और ज्यादा बढ़ गई हैं।

अमेरिका-इजरायल हथियार सौदा

आर्म्स कंट्रोल एसोसिएशन के कार्यकारी निदेशक डेरिल किमबॉल ने अल जजीरा से बातचीत में अमेरिका-इजरायल हथियार सौदे पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि युद्ध को जिस तरह से आगे बढ़ाया गया है, उसे लेकर लगातार निराशा बढ़ रही है। किमबॉल का मानना है कि वॉशिंगटन द्वारा मानवाधिकारों और सहायता से जुड़ी शर्तों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किए बिना इस तरह की हथियारों की खेप भेजना प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार को केवल प्रोत्साहित करता है। यह कदम आगामी चुनाव से पहले नेतन्याहू की सरकार के लिए एक तरह का तोहफा है, ताकि वे यह दिखा सकें कि उन्हें अभी भी अमेरिका का पूरा सपोर्ट है।

मानवाधिकार नियम और इजरायल द्वारा उल्लंघन

अमेरिकी कानून के प्रावधानों को बताते हुए किमबॉल ने स्पष्ट किया कि सहायता पाने वाले देशों को मानवाधिकारों के उल्लंघन में शामिल नहीं होना चाहिए और न ही मानवीय सहायता को रोकना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस बात पर कोई सवाल ही नहीं उठाया जा सकता कि इजरायल ने इन बुनियादी सिद्धांतों का उल्लंघन किया है।