Trump Tariffs :अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा टैरिफ खारिज होने के बावजूद, डोनाल्ड ट्रंप ने हार नहीं मानी है और अब वे विदेशी देशों पर नकेल कसने के लिए 'लाइसेंस फीस' और 15% ग्लोबल टैक्स का नया रास्ता अपना रहे हैं।
Donald Trump : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्यापार जगत को एक नई चेतावनी दे कर तहलका मचा दिया है।उनका टैरिफ क्रिकेट की गूगली और बाउंसर गेंद की तरह हो गया है। बिजनेसमैन और जनता समझ पाएं, उससे पहले ही न समझ में आने वाली गेंद आ जाती है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट (US Supreme Court) की ओर से डोनाल्ड ट्रंप के भारी-भरकम टैरिफ (Tariffs) को अवैध करार दिए जाने के बाद ट्रंप ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। ट्रुथ सोशल (Truth Social) पर एक लंबी पोस्ट में ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के प्रति असम्मान जताते हुए जानबूझकर उसे 'लोअर केस' (lower case letters) में लिखा। ट्रंप ने दावा किया कि इस 'हास्यास्पद और मूर्खतापूर्ण' (ridiculous and dumb) फैसले ने अनजाने में (accidentally and unwittingly) उन्हें राष्ट्रपति के तौर पर पहले से कहीं अधिक ताकत और अधिकार (far more powers and strength) दे दिए हैं। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर (Jamieson Greer )ने कहा कि फैसले के बावजूद सरकार की टैरिफ नीति जस की तस रहेगी।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से भड़के ट्रंप ने लिखा कि अब वह उन विदेशी देशों के साथ बिल्कुल 'भयानक' (terrible) चीजें करने के लिए 'लाइसेंस' (Licenses) का उपयोग कर सकते हैं, जो दशकों से अमेरिका को लूट (RIPPING US OFF) रहे हैं। ट्रंप ने कोर्ट के फैसले पर निराशा जताते हुए पूछा कि जब सभी लाइसेंस फीस वसूलते हैं (BUT ALL LICENSES CHARGE FEES), तो अमेरिका ऐसा क्यों नहीं कर सकता? उनका तर्क है, "आप फीस पाने के लिए ही लाइसेंस देते हैं (You do a license to get a fee!)।"
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम(IEEPA ) नामक कानून का गलत इस्तेमाल कर के दुनिया भर के उत्पादों पर भारी टैक्स लगा दिया था। अदालत के इस फैसले के बाद, ट्रंप ने हार नहीं मानी। उन्होंने तुरंत एक दूसरे कानून का सहारा लिया और सभी देशों से आने वाले सामान पर 10% का नया टैरिफ लगा दिया। इसके ठीक एक दिन बाद, उन्होंने इस दर को बढ़ाकर 15% कर दिया, जो मंगलवार से लागू हो जाएगा।
इस अचानक हुए बदलाव से दुनिया भर के व्यापारी परेशान हैं। ट्रंप का तर्क है कि टैरिफ से अमेरिका में नौकरियां बढ़ेंगी और घरेलू निर्माण को ताकत मिलेगी, लेकिन सच कुछ और ही नजर आ रहा है। न्यूयॉर्क के फेडरल रिजर्व बैंक की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, चीन, मैक्सिको या यूरोप पर लगाए गए इन टैरिफ का 90% आर्थिक बोझ अमेरिकी कंपनियों और वहां के आम उपभोक्ताओं को ही उठाना पड़ रहा है, जिससे महंगाई बढ़ रही है।
ट्रंप ने चेतावनी दी है कि कोर्ट ने अन्य सभी टैरिफ को मंजूरी दी है, जिनका वे अब बहुत अधिक 'शक्तिशाली और आक्रामक तरीके' (powerful and obnoxious way) से इस्तेमाल करेंगे।
अपने अक्षम सुप्रीम कोर्ट (incompetent supreme court) को आड़े हाथों लेते हुए ट्रंप ने साफ कर दिया है कि उनकी नीयत में कोई बदलाव नहीं आया है। पुराने इमरजेंसी कानून के रद्द होने के बाद अब ट्रंप प्रशासन 15% के नए ग्लोबल टैक्स प्लान (15 percent global tax plan) की ओर बढ़ रहा है। ट्रंप का कहना है कि वे सुप्रीम कोर्ट के इस 'विभाजनकारी' (internationally divisive) फैसले को अमेरिका के भविष्य के लिए हानिकारक (deleterious) मानते हैं, लेकिन वे अपना काम करते रहेंगे।
डोनाल्ड ट्रंप की इस नई व्यापारिक नीति और 'लाइसेंस' वाले दांव का असर सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर आम उपभोक्ताओं की जेब पर भी इसका सीधा असर पड़ेगा।
नए 15% ग्लोबल टैरिफ (Global Tariffs) और सख्त लाइसेंसिंग (Licenses) नियमों की वजह से विदेशी कंपनियों के लिए व्यापार करना महंगा होगा, जिससे उत्पाद महंगे हो जाएंगे।
विदेशों से आयात होने वाले मोबाइल, लैपटॉप, कपड़े और ऑटोमोबाइल की कीमतों में इजाफा हो सकता है, क्योंकि कंपनियां अपने टैक्स का बोझ (Tax Burden) अंततः ग्राहकों की जेब से ही वसूलेंगी।
सप्लाई चेन पर असर (Supply Chain Impact): विदेशी व्यापार को कंट्रोल करने की ट्रंप की इस नई नीति से ग्लोबल सप्लाई चेन बाधित हो सकती है, जिससे बाजार में सामानों की कमी होगी और इसका सीधा असर महंगाई के रूप में दिखेगा।
आखिर में "MAKE AMERICA GREAT AGAIN!" का नारा देते हुए ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका फर्स्ट की उनकी नीति के तहत विदेशी देशों और चीन (China) जैसी अर्थव्यवस्थाओं पर नकेल कसने का उनका अभियान जारी रहेगा।
अमेरिकी व्यापार जगत और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों मसलन ब्रिटेन और यूरोपीय संघ) में इस कदम को लेकर भारी निराशा है। व्यापार विशेषज्ञों का कहना है कि रातों-रात नीतियां और टैक्स की दरें बदलने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिका की विश्वसनीयता कम हो रही है और ग्लोबल सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
अब सबकी नजरें अमेरिकी कांग्रेस (संसद) और निचली अदालतों पर टिकी हैं। ट्रंप जिस नए कानून का इस्तेमाल कर रहे हैं, वह केवल 150 दिनों तक ही लागू रह सकता है। इसके बाद इसे जारी रखने के लिए उन्हें कांग्रेस की मंजूरी लेनी होगी। साथ ही, 130 अरब डॉलर की रिफंड याचिका पर निचली अदालतों के फैसले का भी इंतज़ार रहेगा।
इस पूरी बहस में आम अमेरिकी नागरिक पिस रहा है। ट्रंप इसे 'राष्ट्रीय सुरक्षा' का मुद्दा बता रहे हैं, लेकिन अर्थशास्त्रियों की चेतावनी है कि जब विदेशी सामान पर टैक्स बढ़ता है, तो कंपनियां वह लागत सीधे ग्राहकों से वसूलती हैं। यानि ट्रंप के इस कदम से अमेरिका में रोज़मर्रा की चीज़ों के दाम तेज़ी से बढ़ सकते हैं।