
अमेरिकी नौसेना का विमान वाहक जहाज यूएसएस अब्राहम लिंकन (अमेरिका का सबसे ताकतवर युद्धपोत) मिडिल ईस्ट में ईरान अभियान के बाद सीधे थाईलैंड पहुंचेगा।
पिछले कई दिनों से इस युद्धपोत को लेकर काफी चर्चा हो रही थी। यह भी खबर आई थी कि इस जहाज पर सवार करीब 5,000 नाविकों और मरीन सैनिकों का मनोबल गिर गया है। जिसकी वजह से वह गलत कदम भी उठा रहे थे।
रॉयटर्स ने कुछ खास न्यूज वेबसाइटों के हवाले से बताया कि लंबे समय तक समुद्र में रहने से इस युद्धपोत पर तैनात सैनिकों के हालात बिगड़ गए थे। हालांकि, अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इन खबरों को गलत बताया है और कहा कि हालात को गलत तरीके से पेश किया गया।
यह जहाज नवंबर में सैन डिएगो से निकला था। बाद में इसे मिडिल ईस्ट में भेज दिया गया जहां ईरान से जुड़े अमेरिकी सैन्य अभियानों में सहयोग के लिए तैनात किया गया।
सामान्य रूप से नौसेना के जहाज छह से नौ महीने के लिए समुद्र में रहते हैं लेकिन संघर्ष के समय यह अवधि बढ़ जाती है। अब अब्राहम लिंकन ने 200 दिनों से ज्यादा लगातार समुद्र में रहने का आधुनिक रिकॉर्ड बना लिया है। डेमोक्रेटिक सांसदों ने भी इस बात का जिक्र किया है।
अब यह जहाज आराम के लिए थाईलैंड पहुंचेगा। एक थाई अधिकारी ने मंगलवार को बताया कि अगले हफ्ते यूएसएस अब्राहम लिंकन थाईलैंड के बंदरगाह पर रुकेगा।
अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि लंबे समुद्री सफर के बाद नाविकों को आराम और मनोरंजन का मौका मिलेगा। जहाज शनिवार को मध्य पूर्व छोड़ चुका है।
हालांकि, थाई नौसेना और बैंकॉक स्थित अमेरिकी दूतावास के प्रवक्ताओं ने अभी कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं दी है। थाईलैंड और अमेरिका के बीच पुराने सैन्य रिश्ते हैं।
थाईलैंड मुख्य भूमि दक्षिण पूर्व एशिया में अमेरिका का एकमात्र संधि सहयोगी देश है। 1954 से दोनों देश संधि सहयोगी हैं और 2003 से थाईलैंड प्रमुख गैर-नाटो सहयोगी भी है। दोनों देशों की सेनाएं अच्छे संबंध रखती हैं।
लंबे समय तक समुद्र में रहने से सैनिकों पर दबाव बढ़ना आम बात है। परिवार से दूर रहना, सीमित जगह और लगातार काम का बोझ मनोबल को प्रभावित करता है।
रिपोर्ट्स में मानसिक स्वास्थ्य की चिंता जताई गई है लेकिन अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि स्थिति को बढ़ा-चढ़ाकर बताया जा रहा है। जहाज अब थाईलैंड में कुछ दिनों के लिए रुकेगा जिससे चालक दल को थोड़ी राहत मिल सकेगी।